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डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर जयंती पर उनके विचार एवं प्रासंगिक किताबें

लेख – राजू गजभिये (सीताराम), साहित्यकार एवं पत्रकार

डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर जयंती पर उनके विचार एवं प्रासंगिक किताबें

डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की 135वीं जयंती अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके समानता के विचार, समाज सुधार के कार्य, तथा गहन चिंतन–मनन ने उन्हें एक महान अर्थशास्त्री, बहुभाषी वक्ता, संपादक और पत्रकार के रूप में स्थापित किया। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकों से प्रेरणा लेकर हमें समाज में समानता स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।

आज 14 अप्रैल को हम बाबासाहेब अम्बेडकर जी को कोटि-कोटि नमन करते हैं। उनके विचार और लिखित कृतियाँ सदैव अमर रहें और हर व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में जीवित रहें।
भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. अम्बेडकर ने 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन की कड़ी मेहनत से विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया। 29 अगस्त 1947 को वे प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने। उन्होंने समानता (अनुच्छेद 14), भेदभाव निषेध (अनुच्छेद 15) तथा संवैधानिक उपचार (अनुच्छेद 32) जैसे मौलिक अधिकारों को शामिल कर सामाजिक लोकतंत्र की नींव रखी। उनका मानना था कि राजनीतिक लोकतंत्र को सामाजिक लोकतंत्र में परिवर्तित करना आवश्यक है, तभी वास्तविक समानता स्थापित होगी।

डॉ. अम्बेडकर को कोलंबिया विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का गौरव मिला और वे विश्वभर में अपनी विद्वता, पुस्तकों और डिग्रियों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में "जाति का उच्छेद" और "रुपये की समस्या" विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

भारत रत्न से सम्मानित डॉ. अम्बेडकर एक महान विधिवेत्ता, भारतीय संविधान के निर्माता और करोड़ों शोषितों, वंचितों, दलितों, पिछड़ों तथा आदिवासियों को सम्मानजनक जीवन देने वाले युगपुरुष थे। वे तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाले प्रमुख गैर-कांग्रेसी नेता थे।

डॉ. अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में हुआ था। वे दलित बौद्ध आंदोलन के प्रमुख प्रेरणास्रोत भी थे।

📌 महत्वपूर्ण तथ्य

जन्म: 14 अप्रैल 1891, महू (मध्य प्रदेश)
मृत्यु: 6 दिसम्बर 1956
अन्य नाम: बाबासाहेब अम्बेडकर
पिता: रामजी मालोजी सकपाल
माता: भीमाबाई
शिक्षा:
मुंबई विश्वविद्यालय (B.A.)
कोलंबिया विश्वविद्यालय (M.A., Ph.D.)
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (M.Sc., D.Sc.)
ग्रेज इन (Barrister-at-Law)
डॉ. अम्बेडकर 9 भाषाओं के ज्ञाता थे और लगभग 21 वर्षों तक उन्होंने विभिन्न धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन किया। उनके निजी पुस्तकालय “राजगृह” में 50,000 से अधिक पुस्तकें थीं, जो विश्व के सबसे बड़े निजी पुस्तकालयों में से एक था।

डॉ. अम्बेडकर की प्रमुख पुस्तकें
जाति का उच्छेद (Annihilation of Caste) – 1936
रुपये की समस्या: उद्भव और समाधान (The Problem of the Rupee) – 1923
शूद्र कौन और कैसे (Who Were the Shudras?) – 1946
अछूत कौन थे (The Untouchables) – 1948
पाकिस्तान पर विचार (Thoughts on Pakistan) – 1940
रानाडे, गाँधी और जिन्ना (Ranade, Gandhi and Jinnah) – 1943
कांग्रेस और गाँधी ने अछूतों के लिए क्या किया – 1945
भगवान बुद्ध और उनका धर्म (The Buddha and His Dhamma) – 1957
States and Minorities – 1947
Buddha or Karl Marx – 1956

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