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रांची में सिपाही भर्ती परीक्षा: 500 सीटों के लिए हजारों अभ्यर्थियों की भीड़, स्टेशन बना अस्थायी आश्रय

देश में बढ़ती बेरोजगारी की समस्या एक बार फिर सामने आई है। झारखंड की राजधानी रांची में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला, जहां महज 500 पदों के लिए हजारों की संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचे। हालात इतने गंभीर हो गए कि दूर-दराज से आए कई उम्मीदवारों को रहने के लिए कमरा तक नसीब नहीं हुआ और उन्हें रेलवे स्टेशन पर ही रात गुजारनी पड़ी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर के अधिकांश होटल, लॉज और धर्मशालाएं पहले से ही फुल हो चुके थे। आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थी महंगे होटल लेने में असमर्थ थे, जिसके कारण बड़ी संख्या में युवाओं ने स्टेशन के प्लेटफॉर्म को ही अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया। स्टेशन परिसर में हर तरफ बैग लिए युवक-युवतियां जमीन पर सोते नजर आए।

इस भर्ती परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों ने लंबी दूरी तय की, कई ने उधार लेकर यात्रा और फॉर्म फीस भरी। इसके बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल सकीं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इतनी कम सीटों के मुकाबले लाखों आवेदन आना यह दर्शाता है कि देश में रोजगार के अवसर कितने सीमित हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल झारखंड या रांची तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं की बढ़ती निर्भरता और निजी क्षेत्र में अवसरों की कमी इसका मुख्य कारण है। हर साल लाखों युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि रोजगार के अधिक अवसर सृजित किए जाएं, भर्ती प्रक्रियाओं को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए, और परीक्षाओं के दौरान अभ्यर्थियों के लिए आवास व अन्य बुनियादी सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

यह घटना न केवल बेरोजगारी की गंभीरता को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि देश का युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर कितनी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

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