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खोड़री पंचायत खेत तालाब घोटाला: एक माह बाद जवाब, जांच टीम अब तक मैदान से गायब

खोड़री पंचायत खेत तालाब घोटाला: एक माह बाद जवाब, जांच टीम अब तक मैदान से गायब

रामनगर जनपद की खोड़री ग्राम पंचायत में कथित खेत तालाब घोटाले का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच इस विषय को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि पंचायत में कागजों पर खेत तालाब निर्माण दिखाकर शासन की राशि का दुरुपयोग किया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर तालाबों का निर्माण नहीं हुआ या अधूरा पड़ा है। इस मामले में रोजगार सहायक राजेश पांडे द्वारा जनपद सीईओ को करीब एक माह बाद जवाब सौंपा गया है, लेकिन उनके जवाब से कई सवाल और भी गहरे हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि रोजगार सहायक ने अपने लिखित जवाब में खेत तालाबों का निर्माण समय पर न होने के लिए ईएमबी (माप पुस्तिका) की तकनीकी प्रक्रिया और बरसात के मौसम को प्रमुख कारण बताया है। उन्होंने यह तर्क दिया कि लगातार वर्षा के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ और कई स्थानों पर कार्य प्रारंभ नहीं हो सका। हालांकि, उनके इस जवाब में उन गंभीर आरोपों का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिनमें उनकी माता और वर्तमान सरपंच पर अपने ससुर और अन्य रिश्तेदारों को योजना का लाभ देने के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों पर एक शब्द तक न लिखे जाने से ग्रामीणों के बीच संदेह और आक्रोश बढ़ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल खोड़री पंचायत ही नहीं, बल्कि जनपद की अन्य ग्राम पंचायतों में भी इसी प्रकार खेत तालाब निर्माण के नाम पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। जानकारी के अनुसार, पूरे जनपद में कुल 228 खेत तालाब बनाए जाने का दावा किया गया है। इन तालाबों की वास्तविक स्थिति और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच के लिए जनपद सीईओ द्वारा एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। उम्मीद थी कि यह टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण स्थलों का निरीक्षण करेगी और वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेगी।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच टीम के गठन के करीब एक माह बीत जाने के बाद भी टीम के किसी सदस्य के फील्ड में पहुंचने की पुष्टि नहीं हो सकी है। न तो किसी स्थल का निरीक्षण किया गया और न ही अब तक कोई प्रारंभिक या अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जांच प्रक्रिया को जानबूझकर धीमा किया जा रहा है या फिर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गहरी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं की गई, तो शासन की योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। साथ ही, वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने में भी बाधा उत्पन्न होगी।

अब इस पूरे मामले की शिकायत नवागत कलेक्टर विदिशा मुखर्जी से किए जाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि कलेक्टर स्तर पर इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और निष्पक्ष तथा सख्त जांच कराई जाएगी। यदि उच्च स्तर पर जांच शुरू होती है, तो इस कथित घोटाले की सच्चाई सामने आने की संभावना बढ़ जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की उम्मीद भी जताई जा रही है।

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