साइबर ठगी के गांव भर में आरोपी हैं, जिनका रोजगार साइबर ठगी है पढ़िए -
*🚫साइबर ठगी- पुलिस बनकर बात, दूसरा हूटर बजाता, और लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखा पैसा ऐंठते*
कानपुर में पुलिस ने 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये रेउना के रठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मनपुर, बड़ेला और आदिगांव के रहने वाले हैं। ये गांव साइबर ठगी का हॉटस्पॉट बन चुके हैं। यहां हर घर में ठगी का काम किया जाता है।
ठगी के चलते इस इलाके को ‘यूपी का जामताड़ा’ कहा जाने लगा है। पुलिस का कहना है कि जब भी टीम कार्रवाई के लिए पहुंचती है, तो गांव की महिलाएं आरोपियों को बचाने के लिए सामने आ जाती हैं।
यहां पुलिस को कार्रवाई करने के लिए करीब 3 महीने तक फील्ड एक्सरसाइज करनी पड़ी। फिर 6 अप्रैल को पुलिस ने चारों ओर से गांव को घेरकर 20 आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी दूसरे के नाम पर सिम कार्ड खरीदते थे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खुलवाते थे।
इन्हीं सिम और खातों के जरिए आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों को अपने जाल में फंसाकर साइबर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस अब गिरोह के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल है
रेउना थाना क्षेत्र के गांव रठिगांव, समाजनगर, लक्ष्मनपुर, बड़ेला और आदिगांव साइबर-फ्रॉड का गढ़ बन गया है। 5वीं पास से लेकर 12वीं फेल लोग इस काम में शामिल हैं। ठग लोगों को कई तरह से अपने जाल में फंसाते हैं।
ये आरोपी कॉल करने के लिए फर्जी आईडी पर सिम कार्ड खरीदते हैं। उसके बाद पेमेंट्स बैंक के अकाउंट बनाते थे- जैसे कि एयरटेल पेमेंट्स बैंक, फिनों पेमेंट्स बैंक। इन बैंकों के एकाउंट खोलने के लिए केवल एक मोबाइल बैंकिंग एप डाउनलोड करना होता है।
खुद ही आरोपी KYC कर लेते थे। आरोपी इस तरह के एकाउंट को एक खरीदते भी हैं। इसके लिए ये साइबर फ्रॉड अन्य लोगों से एकाउंट और सिम कार्ड खरीदते भी थे।
आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को फोन करके कहते कि आप पोर्न वेबसाइट देखते हैं। मैं पुलिस वाला हूं। हमने तुम्हारी लोकेशन ट्रेस कर ली है। हम लोग गिरफ्तार करने के लिए आ रहे हैं।
इसी बातचीत के बीच में एक सदस्य पुलिस का हूटर बजाया करता था। उसके बाद पहला आरोपी गैंग के तीसरे आरोपी को अपना बॉस बताते हुए बात करने के लिए कहता था। ये लोग केस खत्म करने की बात करते हुए लोगों से रुपए ठगते थे।
हालांकि आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया- हम लोग एक दिन में करीब 50 नंबरों पर फोन करते थे, जिसमें 5 से 6 लोगों को सॉफ्ट टारगेट बनाते थे। उनसे पैसे वसूलते थे। ये आरोपी पैसे गूगल पे, फोन पे या यूपीआई के जरिए एकाउंट में पैसे ट्रांसफर करवाते थे।
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