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कविता: माँ की मूरत दिल में बिठाए


माँ की मूरत दिल में बिठाए,
हर पल उसका नाम लिए,
उसकी ममता की छाया में,
जीवन अपना थाम लिए।

जब भी राहें कठिन लगें,
माँ का चेहरा याद आता है,
उसकी मीठी सी बातें ही,
मन को हौसला दे जाता है।

आँचल में उसके सुकून मिला,
दुनिया की हर थकान से,
उसकी दुआओं की छाया,
बचाती हर तूफ़ान से।

माँ की मूरत दिल में बिठाए,
हर दुख को मैं भूल जाऊं,
उसके चरणों की धूल बनकर,
जीवन सफल बनाऊं।

निस्वार्थ प्रेम की वो मूरत,
हर रिश्ते से बढ़कर है,
माँ के बिना ये जीवन जैसे
सूना सा इक घर है।

माँ की मूरत दिल में बिठाए,
बस इतना अरमान रहे,
जब तक सांसें चलती जाएं,
माँ का ही सम्मान रहे। 😊

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