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मुंगेर की ढोल पहाड़ी बनेगी इको टूरिज्म हब, 12.49 करोड़ की योजना को मिली मंजूरी

मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले को जल्द ही एक बड़ा पर्यटन तोहफा मिलने वाला है। मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड क्षेत्र स्थित ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 12.49 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे,जिससे यह क्षेत्र पर्यटन,धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकेगा।

मुंगेर जिला आने वाले समय में पर्यटकों की पहली पसंद बन सकता है।तारापुर अनुमंडल के असरगंज स्थित ढोल पहाड़ी को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने 12.49 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि ढोल पहाड़ी का ऐतिहासिक महत्व भी काफी खास है।स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह स्थान क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना रहा है, जहां से अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाई जाती थी।

बताया जाता है कि अंग्रेजों के आने की सूचना ढोल बजाकर दी जाती थी, जिससे इसका नाम ‘ढोल पहाड़ी’ पड़ा।
यहां स्थित बाबा मौनीनाथ मंदिर और प्राचीन गुफाएं इस स्थान को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।

परियोजना के तहत यहां बैंक्वेट हॉल,पब्लिक टॉयलेट,हाट-बाजार,क्राफ्ट शॉप्स और वेंडिंग जोन जैसे कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।साथ ही भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और बाबा मौनीनाथ मंदिर व गुफाओं को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाएगा।

सरकार के अनुसार, अब तक सुविधाओं के अभाव में यह क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया था, लेकिन इस परियोजना के पूरा होने के बाद यहां नियमित रूप से हाट-बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

इससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही पूरे प्रोजेक्ट में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

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