रिपोर्ट :
नगर परिषद अध्यक्ष दरख्शां परवीन की कुर्सी खतरे में: जाति प्रमाण पत्र रद्द
मधुपुर नगर परिषद की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरख्शां परवीन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जामताड़ा जिले के करमाटांड़ अंचल अधिकारी (CO) ने शुक्रवार को उनका BC-2 जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है। उन पर गलत वंशावली के आधार पर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप लगा है।
मुख्य बिंदु:
आरोप और कार्रवाई: भाजपा समर्थित प्रत्याशी मिती कुमारी ने आरोप लगाया था कि दरख्शां परवीन ने गलत तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाया है। जांच के बाद अंचल कार्यालय ने इसे रद्द करने का आदेश जारी किया।
चुनावी समीकरण: मधुपुर नगर परिषद अध्यक्ष का पद OBC-2 वर्ग के लिए आरक्षित था। दरख्शां परवीन ने चुनाव जीता था, जबकि मिती कुमारी दूसरे स्थान पर रही थीं।
विवाद का आधार: शिकायतकर्ता के अनुसार, दरख्शां परवीन मूल रूप से बिहार की निवासी हैं, लेकिन उन्होंने झारखंड में गलत वंशावली पेश कर आरक्षण का लाभ लिया। CO घेनाराम हेम्ब्रम ने पुष्टि की कि वंशावली में उनके दादा को दामाद की जगह बेटा दिखाया गया था, जो अवैध है।
न्यायालय में मामला: मामला अब मधुपुर व्यवहार न्यायालय में भी पहुँच चुका है, जहाँ झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत उनकी जीत को चुनौती दी गई है।
पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रिया:
मिती कुमारी (शिकायतकर्ता): "यह सत्य की जीत है। गलत तरीके से पिछड़ों के हक पर डाका डालना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि लोकतंत्र के साथ भी धोखा है।"
दरख्शां परवीन (अध्यक्ष): "मेरा जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं हुआ है, मामला अभी कोर्ट में लंबित है। मेरा प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध आधार पर बना है और हमें कोर्ट के फैसले का इंतज़ार है।"
निष्कर्ष (Conclusion)
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि दरख्शां परवीन की अध्यक्षता अब कानूनी संकट में है। यदि न्यायालय जाति प्रमाण पत्र रद्द होने की पुष्टि कर देता है, तो उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ सकता है। यह मामला न केवल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को दर्शाता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में दस्तावेजों की सत्यता और आरक्षण के नियमों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। आगामी 29 अप्रैल की सुनवाई इस विवाद में निर्णायक साबित हो सकती है।