सहारनपुर से आए हुए नागरिक मजदूरी करने के लिए देहरादून में आए तो सत्यापन ना पाया हुआ किया चालान
सहारनपुर से आने वाले सभी मजदूर भाइयों से सत्यापन ना मिला तो देहरादून पुलिस प्रशासन कर रही है चलन मजदूरों का क्या यह सही है या गलत है और अगर कोई सहारनपुर से मजदूर भाई मजदूरी करने देहरादून आ रहा है उसके उसके पास सत्यापन नहीं है तो चालान पार्टनर जरूरी है या उसको समझाना जरूरी है भारत वासियों की इसमें क्या राय है क्या अपने देश में भी ऐसा होता है की मजदूरी करने पर चालान किया जाता है प्रशासन के द्वारा इस पर देशवासियों के लिए क्या संदेश है और क्या देशवासी इस पर क्या एक्शन लेने वाले हैं देखते हैं