ग्रेटर नोएडा: अतुल कृष्ण भारद्वाज की कथा से गूंजा ऐछर, महाराज ने बताया गृहस्थ जीवन को बैकुंठ बनाने का रहस्य !
श्री धार्मिक रामलीला कमेटी (ऐछर बिरोड़ा, सेक्टर पाई-1) के तत्वाधान में आयोजित श्री राम कथा के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति के रस में डुबो दिया।
कथा के दौरान महाराज ने राम कथा के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिव्य कथा मनुष्य को पाप कर्मों से विरत कर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है।
उन्होंने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत सजीव वर्णन किया और गृहस्थ जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए।
बिना बुलाए कहाँ जाना चाहिए? महाराज ने कथा में स्पष्ट किया कि माता-पिता, मित्र, स्वामी और गुरु के घर बिना बुलाए जा सकते हैं, लेकिन किसी अन्य समारोह में निमंत्रण के बिना जाना अनुचित है। उन्होंने पारिवारिक जीवन में संतुलन, तनाव प्रबंधन और रिश्तों की मर्यादा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
'घर को ही बनाएँ बैकुंठ' मानव जीवन की औसत आयु 70 वर्ष का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि जीवन के चार आश्रमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सन्यास का अर्थ घर छोड़ना नहीं, बल्कि मोह-माया से ऊपर उठकर अपने घर को ही बैकुंठ (स्वर्ग) बनाना है।
हनुमान जी के चरित्र से प्रेरणाकथा के अंत में, महाराज ने हनुमान जी के उदाहरण के माध्यम से भगवान के नाम स्मरण और कीर्तन को दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।