वर्दी में दरिंदगी पर न्याय का प्रहार: बाप-बेटे की पुलिस हिरासत में मौत मामले में 9 दोषियों को मृत्युदंड
सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस: घटना और न्याय
1. घटना की पृष्ठभूमि (जून 2020)
कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स को पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप था कि उन्होंने अपनी मोबाइल की दुकान तय समय से अधिक देर तक खुली रखी थी।
हिरासत के दौरान पुलिस स्टेशन में उनके साथ अमानवीय व्यवहार और गंभीर मारपीट की गई।
गंभीर चोटों के कारण, अस्पताल ले जाने के कुछ समय बाद ही पिता और पुत्र दोनों की मृत्यु हो गई।
2. मद्रास हाईकोर्ट का फैसला
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" (दुर्लभ से दुर्लभतम) श्रेणी में रखा। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियाँ इस प्रकार रहीं:
सख्त सजा: अदालत ने दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा (Death Penalty) सुनाई है।
सत्ता का दुरुपयोग: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल हत्या का मामला नहीं है, बल्कि वर्दी की आड़ में सत्ता का घोर दुरुपयोग और क्रूरता की पराकाष्ठा है।
अमानवीय व्यवहार: न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति राज्य की सुरक्षा में होता है, और रक्षकों का भक्षक बन जाना लोकतंत्र के लिए घातक है।
3. जाँच और कानूनी प्रक्रिया
इस घटना के बाद पूरे देश में "Black Lives Matter" की तर्ज पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
CBI जाँच: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जाँच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी।
मुख्य सबूत: चश्मदीद गवाहों (विशेषकर एक महिला पुलिसकर्मी की गवाही) और फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामले को मजबूत किया।
निष्कर्ष
यह फैसला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। यह स्पष्ट संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, और हिरासत में होने वाली हिंसा (Custodial Torture) को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
नोट: यह सजा उन पुलिसकर्मियों के लिए एक कड़ा सबक है जो अपनी शक्तियों का उपयोग आम नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए करते हैं।
Imtiyaj khan
Social media activist