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पूर्व विधायक संजय यादव का बड़ा हमला: जबलपुर ग्रामीण में अवैध रेत खनन और शराब माफिया के खिलाफ खोला मोर्चा

जबलपुर: जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के अध्यक्ष और पूर्व विधायक संजय यादव ने जबलपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में फल-फूल रहे अवैध कारोबार को लेकर प्रशासन के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखे एक पत्र में यादव ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि सत्ता के संरक्षण में माफिया बेखौफ होकर अवैध रेत खनन, शराब की तस्करी और जुआ-सट्टा का संचालन कर रहे हैं।
रेत माफिया का जल और जमीन पर कब्जा
संजय यादव ने पत्र में उल्लेख किया कि बेलखेड़ा क्षेत्र के सुनाचर, कूड़ा, नवीन, चरगवां, और मझौली तहसील सहित कई क्षेत्रों में पानी के अंदर से अवैध रेत उत्खनन जारी है। उन्होंने दावा किया कि इसकी पूरी जानकारी तहसीलदारों, SDM और थाना प्रभारियों को है, लेकिन 'ऊपर' के दबाव और वसूली के खेल के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस अवैध उत्खनन से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
गांव-गांव बिक रही अवैध शराब
पत्र में शराब माफियाओं पर प्रहार करते हुए कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानों से हटकर अब सीधे गांवों के भीतर शराब बेची जा रही है। यादव ने आरोप लगाया कि:
"सत्ता से जुड़े लोग शराब ठेकेदारों के साथ बिना किसी लागत के 50% की पार्टनरशिप कर रहे हैं या फिर मासिक वसूली (महीना) ले रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं (मातृशक्ति) में भारी आक्रोश है।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
पूर्व विधायक ने जुआ और सट्टा के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस को इन सभी गतिविधियों की जानकारी है, लेकिन "मिल-बांटकर खाने" की प्रवृत्ति और सत्ता के दबाव के कारण कार्रवाई ठंडे बस्ते में है।
आंदोलन की चेतावनी
संजय यादव ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इन अवैध गतिविधियों पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो जिला कांग्रेस कमेटी तहसील और पंचायत स्तर पर जन आंदोलन करेगी। साथ ही, कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव करने की चेतावनी भी दी गई है।
इस पत्र की प्रतिलिपि E.O.W. (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) और अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को भी भेजी गई है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
मुख्य बिंदु:
विषय: अवैध रेत उत्खनन, अवैध शराब और जुआ-सट्टा पर प्रतिबंध।
प्रमुख क्षेत्र: बेलखेड़ा, मझौली, कटंगी, चरगवां, पाटन, शाहपुरा।
दावा: अधिकारियों की मिलीभगत और सत्तापक्ष का संरक्षण।
अल्टीमेटम: कार्रवाई न होने पर उग्र जन आंदोलन और घेराव।

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