वो छोटा सा डिवाइस, जिसने ईरानी सरजमीं पर बचाई अमेरिकी पायलट की जान, खासियत भी जान लीजिए
ईरान जैसी दुर्गम और दुश्मन सेना से घिरी सरजमीं पर, जहां एक-एक पल भारी होता है, वहां इस छोटे से डिवाइस ने 'जीवनदान' की भूमिका निभाई।
क्या था वो वाकया?
शीत युद्ध (Cold War) के बाद और खाड़ी युद्ध के दौरान कई ऐसे किस्से सामने आए जब अमेरिकी विमान दुश्मन के रडार या मिसाइलों का शिकार हुए। ऐसी ही एक घटना में, जब पायलट को पैराशूट से अनजान इलाके में उतरना पड़ा, तो उसकी एकमात्र उम्मीद उसका Survival Radio था। यह डिवाइस इतना छोटा था कि पायलट की जैकेट की जेब में आ जाए, लेकिन इसकी पहुंच आसमान की ऊंचाइयों तक थी।
इस नन्हे डिवाइस की 4 बड़ी खासियतें
1. सटीक लोकेशन (GPS Tracking)
उस दौर में भी इन डिवाइस में ऐसी फ्रीक्वेंसी होती थी जो सैटेलाइट और ऊपर से गुजर रहे 'AWACS' (Early Warning and Control) विमानों को पायलट की सटीक लोकेशन भेज सकती थी। इसके जरिए बचाव दल को यह पता चल जाता था कि पायलट किस पहाड़ी या किस गुफा में छुपा है।
2. 'लो-प्रोफाइल' कम्युनिकेशंस
इस रेडियो की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि यह 'Burst Transmission' का इस्तेमाल करता था। इसका मतलब है कि यह बहुत कम समय के लिए सिग्नल भेजता था ताकि दुश्मन की इंटेलिजेंस इसे ट्रैक न कर सके।
3. 'बीकन' मोड (Beacon Mode)
अगर पायलट बोलने की स्थिति में न हो या उसे छुपकर रहना हो, तो वह इसमें एक साइलेंट 'बीकन' चालू कर सकता था। यह बीकन एक खास फ्रीक्वेंसी पर सिग्नल भेजता रहता था, जिसे सिर्फ मित्र देशों के विमान ही सुन सकते थे।
4. हर मौसम का साथी
यह डिवाइस वॉटरप्रूफ, शॉकप्रूफ और भीषण गर्मी या ठंड झेलने के लिए बनाया गया था। ईरान के रेगिस्तानी और पहाड़ी इलाकों के उतार-चढ़ाव भरे तापमान में भी इसने काम करना बंद नहीं किया।
बचाव अभियान (The Rescue)
जब इस डिवाइस ने सिग्नल भेजा, तो पास के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात Search and Rescue (SAR) टीम सक्रिय हो गई। रेडियो की मदद से पायलट और बचाव दल के बीच 'कोड वर्ड्स' में बात हुई ताकि पुष्टि हो सके कि वह असल में उनका ही पायलट है, कोई दुश्मन नहीं। अंततः, ब्लैक हॉक या सी स्टैलियन हेलीकॉप्टर ने आकर उस पायलट को सुरक्षित निकाल लिया।
सीख: युद्ध के मैदान में सिर्फ बड़े बम और मिसाइलें ही काम नहीं आतीं, बल्कि तकनीक का एक छोटा सा टुकड़ा भी हार और जीत (या जीवन और मृत्यु) के बीच की दीवार बन सकता है।
आज के समय में इसकी जगह और भी आधुनिक CSEL (Combat Survivor Evader Locator) रेडियो ने ले ली है, जो पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड और सैटेलाइट आधारित हैं। लेकिन उस दौर में, उस छोटे से डिब्बे ने वाकई एक चमत्कार कर दिखाया था।