कांग्रेस द्वारा लाए गए "सांप्रदायिक लक्षित हिंसा अधिनियम" और मोदी द्वारा अपडेटेड किए गए "एट्रेसिटी एक्ट" में कोई खास अंतर नहीं है
कांग्रेस द्वारा लाए गए "सांप्रदायिक लक्षित हिंसा अधिनियम" और मोदी द्वारा अपडेटेड किए गए "एट्रेसिटी एक्ट" में कोई खास अंतर नहीं है...
कांग्रेस वाला हिंदू मुस्लिम के बीच भेद करता था,, और मोदी वाला हिंदुओं के अंदर ही भेद करता है...
सवर्णों को "दूसरे दर्जे का नागरिक" बनाता है..
अलबत्ता दोनों के बीच एक प्रमुख अंतर जरूर है..
कांग्रेस वाले कानून का सवर्णों ने जमकर कठोर विरोध किया था...
लेकिन "अब्दुल के डर" से हिंदुत्व का चूरन चाटे हुए सवर्ण, अभी भी मोदी वाले इस काले कानून का खुलकर एकमत विरोध नहीं कर पा रहे हैं...
वास्तव में भाजपा ने "अब्दुल का डर" इतना जबरदस्त पैदा किया है, कि एट्रेसिटी एक्ट के बाद, यूजीसी एक्ट आने के बावजूद सवर्ण अपने बच्चों के भविष्य को भी दांव पर लगाने के लिए तैयार है..