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दिल का बसेरा – अध्याय 3 (कहानी) शेख जमीरुल हक खान चौधरी

अध्याय 3



सुबह की ठंडी हवा खिड़की से अंदर आ रही थी…

लेकिन आज उसकी आँखें खुद-ब-खुद जल्दी खुल गईं।

जैसे उसे किसी का इंतज़ार हो…

वह धीरे से उठी, खिड़की के पास गई और बाहर देखने लगी।

दिल में एक ही ख्याल—

“क्या वो आज फिर दिखेगा…?”



💭 दिल की बेचैनी

आज उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था।

माँ बार-बार आवाज़ दे रही थीं—

“ध्यान कहाँ है तुम्हारा?”

वह चौंक जाती—

“जी… कुछ नहीं…”

लेकिन सच तो ये था कि उसका दिल अब उसके पास था ही नहीं।

वो कहीं और जा चुका था…

किसी अनजान के पास।



🏠 घर और जिम्मेदारियाँ

घर में सब कुछ पहले जैसा ही था—

काम, जिम्मेदारियाँ, वही दिनचर्या…

लेकिन उसके अंदर कुछ बदल चुका था।

अब वह हर काम जल्दी-जल्दी खत्म करना चाहती थी…

ताकि शाम जल्दी आए।



🌇 इंतज़ार की घड़ी

आखिरकार… शाम हो ही गई।

आज वह बिना देर किए छत पर पहुंच गई।

दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।

हवा चल रही थी… आसमान हल्का सुनहरा था…

और उसकी नजरें बस एक ही दिशा में टिकी थीं।



👤 तीसरी मुलाकात – पहली बात

कुछ ही पलों बाद…

वह फिर दिखाई दिया।

आज वह पहले से थोड़ा और पास खड़ा था।

उसने धीरे से उसकी तरफ देखा…

और इस बार नजरें हटाईं नहीं।

कुछ सेकंड तक दोनों बस एक-दूसरे को देखते रहे।

फिर…

लड़के ने हल्की-सी आवाज़ में कहा—

“तुम रोज़ यहाँ आती हो…?”

उसका दिल जैसे एक पल के लिए रुक गया।

वह घबरा गई…

लेकिन फिर भी धीरे से बोली—

“हाँ… कभी-कभी…”

उसकी आवाज़ धीमी थी… लेकिन सच्ची।



💓 बातों की शुरुआत

दोनों के बीच हल्की-सी खामोशी छा गई…

लेकिन वो खामोशी भी अजीब-सी अच्छी लग रही थी।

फिर उसने पूछा—

“तुम यहीं रहती हो?”

वह सिर हिलाकर बोली—

“हाँ…”

अब दोनों थोड़ा सहज होने लगे थे।

नाम पूछने की हिम्मत अभी नहीं हुई…

लेकिन दिलों में एक रिश्ता बनने लगा था।



🌙 दिल में नया एहसास

थोड़ी देर बाद वह वापस नीचे आ गई।

लेकिन आज कुछ अलग था—

आज उसने उससे बात की थी।

उसकी आवाज़ अब भी कानों में गूंज रही थी…

वह आईने के सामने खड़ी हुई और खुद को देखने लगी—

चेहरे पर मुस्कान थी… जो छुपाए नहीं छुप रही थी।



💭 रात की सोच

रात को वह बिस्तर पर लेटी थी…

लेकिन नींद आज भी दूर थी।

वह बस उसी पल को याद कर रही थी—

उसकी आवाज़…

उसकी मुस्कान…

और वह एक छोटा-सा सवाल…

उसने आँखें बंद कीं और धीरे से मुस्कुराई—

“अब ये सिर्फ इत्तेफाक नहीं है…”



✨ रिश्ता गहराने लगा

आज उनकी कहानी एक कदम आगे बढ़ चुकी थी—

अब सिर्फ नजरें नहीं मिलतीं

अब बातें भी होने लगी हैं

दिल में एक नया एहसास था—

जो धीरे-धीरे गहराता जा रहा था…

और कहीं न कहीं…

उसका “दिल का बसेरा” अब आकार लेने लगा था 💓

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