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जाँच पर सवाल: चोरभट्ठी नाली निर्माण विवाद में शिकायतकर्ता को धमकी, पारदर्शिता पर संकट

चित्रसेन घृतलहरे, AIMA MEDIA//जनपद पंचायत बिलाईगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत चोरभट्ठी में नाली निर्माण कार्य में अनियमितताओं की शिकायत पर की गई जाँच अब गंभीर विवादों में उलझ गई है। जाँच के दौरान शिकायतकर्ता के साथ कथित अभद्रता व धमकीपूर्ण व्यवहार सामने आने के बाद न केवल जाँच की निष्पक्षता, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता भी कठघरे में आ खड़ी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत द्वारा गठित जाँच दल—जिसमें कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) किसन जायसवाल तथा सहायक विकास विस्तार अधिकारी राघवेंद्र ध्रुव शामिल थे—द्वारा नियमानुसार जाँच कार्यवाही शुरू की गई। शिकायतकर्ता, सरपंच अंजना जांगड़े और सचिव प्रेमलाल साहू को पूर्व सूचना देकर आवश्यक दस्तावेजों सहित उपस्थित होने के निर्देश जारी किए गए थे।
■ पंचायत कार्यालय में ही तनाव, शिकायतकर्ता ने लगाए धमकी के आरोप
जाँच की शुरुआत पंचायत भवन में पंचनामा तैयार कर सभी पक्षों के बयान दर्ज करने से हुई। इसी दौरान शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाया कि सरपंच अंजना जांगड़े ने उसके प्रति आक्रामक, अभद्र और धमकीपूर्ण व्यवहार किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि सरपंच लगातार घूरकर देख रही थी और अपमानजनक शब्दों का उपयोग कर रही थी, जिससे वह स्वयं को असहज, भयभीत और मानसिक दबाव में महसूस करने लगा।
■ निर्माण स्थल पर सत्यापन से पहले ही शिकायतकर्ता लौटा
बयान प्रक्रिया पूरी होने के बाद जाँच दल ने सभी को निर्माण स्थल पर भौतिक सत्यापन के लिए साथ चलने कहा, लेकिन शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सरपंच द्वारा पंचायत भवन में ही निरंतर दबाव व भय का वातावरण बनाया जा रहा था। सुरक्षा की चिंता के कारण वह जाँच स्थल तक जाने से परहेज करते हुए लौट गया।
■ व्हाट्सऐप पर भेजे साक्ष्य, निष्पक्ष जाँच की मांग
घटना के बाद जाँच अधिकारियों ने फोन पर शिकायतकर्ता को पुनः आने के लिए कहा, इस पर उसने स्वयं को असुरक्षित बताते हुए निर्माण कार्य से जुड़े वीडियो व फोटो साक्ष्य जाँच अधिकारी राघवेंद्र ध्रुव के मोबाइल पर भेज दिए। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष, निर्भीक और बिना दबाव की जाँच की मांग की है।

यह पूरा मामला कई गंभीर सवाल उठाता है—
1️⃣ क्या जाँच के दौरान शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है?
2️⃣ यदि अधिकारियों की मौजूदगी में ही शिकायतकर्ता धमकी महसूस करे, तो जाँच की पारदर्शिता कैसे कायम रह सकती है?
3️⃣ क्या भ्रष्टाचार की शिकायत करने वालों को भय दिखाना प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ नहीं?
4️⃣ क्या भ्रष्टाचार के विरोधियों को यूँ ही डराया-धमकाया जाता रहेगा? क्या वे आपराधिक साजिशों के शिकार होते रहेंगे?
यह प्रकरण न केवल स्थानीय प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि उन सभी शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों को भी रेखांकित करता है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का साहस करते हैं। अब देखना यह होगा कि उच्च प्रशासन इस गंभीर मामले को किस तरह लेता है और क्या निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जाती है या नहीं।

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