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महिला शिक्षण विहार को 20 साल बाद मिला भूमि पट्टा: झालावाड़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि

झालावाड़ के महिला शिक्षण विहार को लगभग 20 सालों के इंतजार के बाद भूमि का विधिवत पट्टा प्राप्त हो गया है। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ द्वारा चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत यह उपलब्धि हासिल हुई। यह पट्टा संस्थान की प्राचार्य को सौंपा गया, जिससे अब महिला शिक्षण विहार को अपनी गतिविधियों के संचालन, विस्तार और विकास के लिए वैधानिक मजबूती मिल गई है।
भूमि अधिकार मिलने से संस्थान को स्थायित्व और सुरक्षा प्राप्त हुई है। अब महिला शिक्षण विहार अपने भवनों का विस्तार कर सकेगा, आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ कर पाएगा और नए प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना भी कर सकेगा। यह पट्टा सरकारी योजनाओं और अनुदानों का लाभ लेने में भी सहायक सिद्ध होगा, जिससे यहां अध्ययनरत बालिकाओं और महिलाओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
वर्ष 1997 से संचालित यह संस्थान जिले की महिलाओं और बालिकाओं के लिए एक सशक्तिकरण केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। यहां औपचारिक शिक्षा के साथ-साथ जीवन कौशल, आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। संस्थान आर्थिक रूप से कमजोर, विधवा, परित्यक्ता एवं जरूरतमंद महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संस्थान में आवासीय सुविधा, भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली बालिकाएं सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें। इसके अतिरिक्त, सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर और हस्तशिल्प जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को रोजगारोन्मुख बनाया जाता है।

जिला प्रशासन की सफलता की मिसाल
यह उपलब्धि जिला प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, इसके तहत वर्षों से लंबित मामलों का समाधान प्राथमिकता से किया जा रहा है। कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के नेतृत्व में चलाए जा रहे विशेष अभियान ने न केवल प्रक्रियाओं को गति दी, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक परिवर्तन भी सुनिश्चित किया।इस अवसर पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) सीताराम मीणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


तकनीक और संवेदनशीलता का संगम: 7 साल की दिव्यांग आशा के जीवन में आया नया सवेरा

आधुनिक तकनीक जब मानवीय संवेदनाओं से मिलती है, तो वह समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए वरदान बन जाती है। झालावाड़ जिले की ग्राम पंचायत बैरागढ़ में मस्तिष्क पक्षाघात और बौद्धिक अक्षमता से जूझ रही 7 साल की मासूम बच्ची 'आशा' के लिए प्रशासन की यह नेक पहल एक नई उम्मीद लेकर आई है
जिला प्रशासन की सफलता की मिसाल
यह उपलब्धि जिला प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, इसके तहत वर्षों से लंबित मामलों का समाधान प्राथमिकता से किया जा रहा है। कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ के नेतृत्व में चलाए जा रहे विशेष अभियान ने न केवल प्रक्रियाओं को गति दी, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक परिवर्तन भी सुनिश्चित किया।इस अवसर पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) सीताराम मीणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


तकनीक और संवेदनशीलता का संगम: 7 साल की दिव्यांग आशा के जीवन में आया नया सवेरा

आधुनिक तकनीक जब मानवीय संवेदनाओं से मिलती है, तो वह समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए वरदान बन जाती है। झालावाड़ जिले की ग्राम पंचायत बैरागढ़ में मस्तिष्क पक्षाघात और बौद्धिक अक्षमता से जूझ रही 7 साल की मासूम बच्ची 'आशा' के लिए प्रशासन की यह नेक पहल एक नई उम्मीद लेकर आई है।
बालिका के पिता रमेश कई बार आधार केंद्रों के चक्कर काट चुके थे, लेकिन प्रतिकूल शारीरिक स्थिति के कारण बच्ची की उंगलियों के निशान स्कैन नहीं हो पा रहे थे। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ की संवेदनशीलता और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) के विशेष प्रयासों से कई असफल कोशिशों के बाद आखिरकार आधार नामांकन सफलतापूर्वक पूरा किया।



Aima media jhalawar

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