वर्षों से असम के चाय बागानों में मेहनत करने वाला हमारा आदिवासी समाज आज भी अपने हक और अधिकार से वंचित है।
वर्षों से असम के चाय बागानों में मेहनत करने वाला हमारा आदिवासी समाज आज भी अपने हक और अधिकार से वंचित है। देश की चाय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान देने के बावजूद, उन्हें सिर्फ संघर्ष ही मिला है, यह अन्याय अब नहीं चलेगा।
तीर-धनुष हमारे लिए सिर्फ एक चुनाव चिन्ह नहीं है, यह हमारे साहस, हमारे स्वाभिमान और हमारे संघर्ष का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि जब बात अपने अधिकार की हो, तो पीछे हटना हमारा स्वभाव नहीं है।
हम भगवान बिरसा मुंडा के वंशज हैं, हम अन्याय सहना नहीं, उसका सामना करना जानते हैं। हम अपना हक मांगते नहीं, उसे हासिल करना जानते हैं।