बस्तर माओवाद मुक्त: 31 मार्च की डेडलाइन के साथ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ा अभियान सफल रहा।
छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा बलों ने 31 मार्च की समय सीमा (Deadline) निर्धारित की थी, जिसका उद्देश्य बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों से नक्सलियों का पूरी तरह सफाया करना या उन्हें मुख्यधारा में लाना था।
रिकॉर्ड आत्मसमर्पण: इस अभियान के दबाव में आकर पिछले कुछ हफ्तों में सैकड़ों माओवादियों ने हथियार डाले हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में कई इनामी नक्सली भी शामिल हैं।
रणनीतिक सफलता: सुरक्षा बलों ने बस्तर के उन 'कोर क्षेत्रों' (जैसे अबूझमाड़) में नए कैंप स्थापित किए हैं, जिन्हें कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था।
पुनर्वास नीति: सरकार की 'नई पुनर्वास नीति' ने भी अहम भूमिका निभाई है, जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।
प्रमुख हस्तियों के बयान
विष्णु देव साय (मुख्यमंत्री): उन्होंने इसे "शांति की नई सुबह" कहा और विश्वास दिलाया कि अब विकास की योजनाएं बस्तर के अंतिम व्यक्ति तक निर्बाध रूप से पहुंचेंगी।
अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री): केंद्र ने राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि नक्सलवाद का अंत अब अंतिम चरण में है।
इसका क्या प्रभाव होगा?अब प्रशासन का ध्यान 'विश्वास-विकास-सुरक्षा' के मंत्र पर है, ताकि इन क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जा सके और मूलभूत सुविधाएं हर गांव तक पहुंचाई जा सकें।