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टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 4 अप्रैल को दिल्ली में जुटेंगे शिक्षक

एक हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं के शामिल होने की तैयारी, पूर्व नियुक्त शिक्षकों को छूट की मांग तेज


शाहजहांपुर, 31 मार्च।
टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री संजय सिंह ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया तो देशभर के शिक्षक आंदोलन तेज करेंगे।

सत्यम होटल, टाउनहॉल में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि 4 अप्रैल 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें शाहजहांपुर से एक हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं भाग लेंगी। इस प्रदर्शन की अनुमति दिल्ली सरकार द्वारा दे दी गई है।

संजय सिंह ने कहा कि भारत सरकार की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना में टीईटी को अनिवार्य किया गया था, लेकिन इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट दी गई थी। अलग-अलग राज्यों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम अलग समय पर लागू हुआ, ऐसे में पूर्व नियुक्त शिक्षकों को भी राहत मिलनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश (सिविल अपील संख्या 1385/2025) के भूतलक्षी प्रभाव से देशभर के करीब 20 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। यदि तय समय में टीईटी पास नहीं किया गया तो सेवा समाप्ति का खतरा उत्पन्न हो सकता है।

संजय सिंह ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया लगातार प्रयासरत है। सांसदों के माध्यम से ज्ञापन दिए गए, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन हुए और शिक्षा मंत्री से वार्ता भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार कानून बनाकर इस आदेश के भूतलक्षी प्रभाव को समाप्त करे और शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दे। साथ ही सभी शिक्षकों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचकर आंदोलन को सफल बनाएं।

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