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माइनिंग विभाग की टीम के खनन पट्टों, क्रेशर प्लांटों और भंडारणों पर अनावश्यक छापेमारी और पोर्टल बंदी से लीगल मीनिंग प्रभावित,अवैध खनन को मिल रहा बढ़ावा

विकासनगर: खनन अधिकारियों द्वारा लगातार की जा रही छापेमारी और सख्त कार्रवाइयों से वैध रूप से खनन व्यवसाय करने वाले व्यवसायी परेशान हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध खनन पर अंकुश लगाना और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना है, लेकिन इससे नियमित व्यावसायिक गतिविधियों में व्यवधान, परिवहन में देरी और परिचालन लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियाँ उत्पन्न हो गई हैं, बड़ी-बड़ी कंस्ट्रक्शन साईट प्रभावित हो रही है आम जनमानस महंगे दामों पर सामग्री खरीदने पर मजबूर है इससे सरकार को भी रॉयल्टी के रूप में मिलने वाले राजस्व में भी भारी नुकसान हो रहा है।

आपको बता दें कि जब से जिला खान अधिकारी के पद पर ऐश्वर्या शाह की नियुक्ति हुई है तब से खनन विभाग की टीम पछवादून क्षेत्र में ही ज्यादा सक्रिय है लगातार छापेमारी की जा रही है बिना वजह ही खनन पट्टों के पोर्टल बंद कर दिए जा रहे हैं पट्टा स्वामियों ,भंडारण स्वामीयों और क्रेशर संचालकों पर मनमर्जी जुर्माने ठोके जा रहे हैं तुगलक की फरमान सुना दिए जा रहे हैं जिससे महिनों महिनों खनन कारोबार बंद हो रहा है पछुवादून कि लगभग सभी नदियों में खनन व्यवसाय बंद है मानो शायद जिले की अन्य जगह परवादून या अन्य नदियों पर खनन व्यवसाय करने वालों ने जिला खान अधिकारी को पूरे पछुवादून में खनन का कारोबार बंद करने का ठेका दे दिया हो और जिला खान अधिकारी महोदय बखूबी उस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।

वर्ष 2025-26 में अक्टूबर माह से पछुवादून की किसी भी नदी में अब तक खनन का कारोबार शुरू नहीं हो पाया है मानो यमुना नदी को तो बिल्कुल टारगेट ही कर दिया है क्षेत्र में जैसे ही किसी खनन पट्टे का पोर्टल खुलता है और काम शुरू होता है तभी जिला खान अधिकारी महोदय या उनकी टीम खनन पट्टे पर पहुंचकर कुछ ना कुछ बहाना लगाकर पोर्टल बंद कर देती है और खनन कार्य पूर्णतः महीने भर के लिए ठप हो जाता है।

व्यापारियों का पक्ष है कि वैध रॉयल्टी देने के बाद भी पोर्टल बंद होना या छापेमारी उनके व्यवसाय को ठप कर रही है, जिससे मजदूरों और मालिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।दूसरी ओर, बाजार में रेत-बजरी के बढ़ते दाम सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। जब सप्लाई चेन प्रभावित होती है, तो निर्माण कार्य की लागत बढ़ना स्वाभाविक है। वैध रूप से खनन का कारोबार बंद होने से अवैध खनन करने वाले कहीं ना कहीं आम जनमानस से मोटा रकम वसूल रहे हैं क्योंकि जो जब वैध रूप से खनन का कारोबार बंद होता है तो अवैध खनन का कारोबार बढ़ना स्वाभाविक है इससे खनन व्यवसाययों के साथ-साथ सरकार को भी एक बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा है।

इस समस्या के समाधान के लिए आमतौर पर ये कदम कारगर हो सकते हैं:

संयुक्त बैठक:खनन विभाग के अधिकारियों और व्यापार मंडल के बीच सीधी वार्ता ताकि अनावश्यक दबाव और पोर्टल संबंधी तकनीकी दिक्कतों को दूर किया जा सके।

पारदर्शी मॉनिटरिंग:छापेमारी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए ताकि वैध व्यापारियों को बेवजह परेशान न होना पड़े।

रेट कंट्रोल: जिला प्रशासन द्वारा निर्माण सामग्री के दाम तय किए जाएं ताकि जनता को बढ़ी हुई कीमतों से राहत मिल सके।

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