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मुरादाबाद में 21 साल तक फर्जी पहचान में रह रहा हिस्ट्रीशीटर गिरफ्तार, “सुल्तान” बनकर जी रहा था फरार नरेश

मुरादाबाद/संभल। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश ने करीब 21 वर्षों तक अपनी असली पहचान छुपाकर दूसरे नाम और अलग पहचान के साथ जीवन बिताया। आरोपी ने न केवल अपना नाम बदला बल्कि अपनी पूरी जीवनशैली और पहचान बदलकर लोगों के बीच घुलमिल गया।आखिरकार आधुनिक तकनीक और पुलिस की सतर्कता के चलते उसका भंडाफोड़ हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुरादाबाद के पाकबड़ा थाना क्षेत्र के गांव हासमपुर गोपाल निवासी नरेश नाम का व्यक्ति लगभग 21 साल पहले किसी आपराधिक मामले में फरार हो गया था। लंबे समय तक पुलिस उसकी तलाश करती रही, लेकिन वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा और गिरफ्त से बाहर रहा। फरारी के दौरान वह पड़ोसी जनपद संभल के नखासा थाना क्षेत्र में जाकर बस गया।

वहां पहुंचकर नरेश ने बेहद शातिर तरीके से अपनी पहचान बदल ली और “सुल्तान” नाम से रहने लगा। उसने अपने हुलिए में भी पूरी तरह बदलाव कर लिया—दाढ़ी बढ़ा ली, सिर पर टोपी पहनने लगा और स्थानीय समाज में खुद को पूरी तरह उसी पहचान के अनुरूप ढाल लिया। इतना ही नहीं, वह नियमित रूप से मस्जिद में आने-जाने लगा, जिससे आसपास के लोगों को उस पर कभी कोई शक नहीं हुआ।

आरोपी की चालाकी यहीं खत्म नहीं हुई। उसने अपने नए नाम से फर्जी पहचान पत्र भी बनवा लिए, जिनके आधार पर वह वर्षों तक सामान्य जीवन जीता रहा। स्थानीय लोगों के बीच उसने अपनी एक अलग पहचान बना ली थी और किसी को भी उसकी असलियत की भनक तक नहीं लगी।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपराधियों का डेटा “यक्ष ऐप” पर अनिवार्य रूप से अपलोड और अपडेट करने का अभियान चलाया गया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जब पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान डेटा का मिलान किया गया, तब नरेश की असली पहचान सामने आई। तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हो गया कि “सुल्तान” नाम से रह रहा व्यक्ति दरअसल मुरादाबाद का फरार हिस्ट्रीशीटर नरेश ही है।

जैसे ही यह जानकारी पुलिस को मिली, तुरंत उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई।पुलिस ने गुप्त सूचना और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर आरोपी को ट्रैक किया और शनिवार को उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने अपनी असली पहचान कबूल कर ली।

पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल है, क्योंकि यह मामला दर्शाता है कि किस तरह एक अपराधी वर्षों तक सिस्टम को चकमा देकर अलग पहचान के साथ रह सकता है।

इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था, पहचान सत्यापन और स्थानीय स्तर पर सतर्कता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब डिजिटल तकनीक, डेटा इंटीग्रेशन और “यक्ष ऐप” जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अपराधियों की पहचान छुपाना आसान नहीं रह गया है।

पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने आसपास रहने वाले लोगों की गतिविधियों पर सतर्क नजर रखें। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध लगे या उसकी पहचान को लेकर संदेह हो, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। समय रहते दी गई जानकारी किसी बड़े अपराध या खतरे को टाल सकती है।

यह मामला न सिर्फ पुलिस की तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि समाज में सतर्कता और जागरूकता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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