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Sonitpur ज़िला के singri Bangali Gaon (असम)का टूटा पुल: हर दिन हादसे से जंग, फिर भी खामोश प्रशासन

Sonitpur ज़िला के Singri Bangali Gaon(असम )का यह पुल आज खतरे का दूसरा नाम बन चुका है। कुछ महीने पहले अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया था, लेकिन उसके बाद से न कोई मरम्मत हुई और न ही जनता को कोई ठोस आश्वासन मिला। आज स्थिति यह है कि यह पुल पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पुल के बीचों-बीच बड़ा गड्ढा हो गया है, जिसमें नीचे की लोहे की जाली खुलकर बाहर आ चुकी है। यह गड्ढा इतना खतरनाक है कि अगर कोई बाइक, साइकिल या पैदल चलने वाला व्यक्ति थोड़ा सा भी संतुलन खो दे, तो सीधे नीचे गिर सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसी रास्ते से रोज़ाना सैकड़ों बच्चे स्कूल और कॉलेज जाते हैं।

पुल के किनारों की हालत भी बेहद खराब है। सुरक्षा के लिए लगाए गए कंक्रीट के खंभे टूट चुके हैं और कई जगहों पर रेलिंग पूरी तरह से गायब है। इसका मतलब है कि जरा सी लापरवाही या अंधेरे में चलने पर कोई भी व्यक्ति सीधे नीचे नाले या खाई में गिर सकता है।

रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है क्योंकि वहां किसी भी प्रकार की स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। अंधेरे में यह पुल एक मौत का जाल बन जाता है, जहां हर गुजरने वाला व्यक्ति अपनी जान जोखिम में डालकर निकलता है।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या को प्रशासन के सामने उठाया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। कोई ठोस कार्रवाई आज तक नहीं हुई। वहीं युवा वर्ग में भी भारी आक्रोश है, क्योंकि यह रास्ता उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा है।

गाड़ियों का आवागमन भी इसी पुल से होता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। भारी वाहन गुजरते समय पुल और कमजोर हो जाता है, और किसी दिन यह पूरी तरह से ध्वस्त हो सकता है।

यह सिर्फ एक पुल नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जीवनरेखा है। अगर समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन से बच नहीं पाएगी।

हम सरकार और संबंधित विभागों से कड़ी अपील करते हैं कि इस पुल की तुरंत मरम्मत करवाई जाए, सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जाए। साथ ही, जब तक मरम्मत नहीं होती, तब तक यहां चेतावनी बोर्ड और अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

गांव के लोगों का जीवन किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाला जा सकता। अब वक्त आ गया है कि सिर्फ निरीक्षण नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जाए।

“अगर आज नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी।”

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