मृत्युभोज महापाप है...
रात्रिभोज से भी बड़ा पाप है मृत्युभोज। मृत्युभोज भारतीय समाज के माथे पर लगा कुप्रथा का एक कलंक है। मृत्युभोज महज एक कुरीति या कुपरम्परा ही नहीं बल्कि गरीबों के साथ किये जाने वाला एक क्रूर मजाक भी है। कैसी विडम्बना है कि किसी परिवार का सहारा चला गया, किसी की आंखों का तारा चला गया और हम हैं कि उसके घर पर दावतें उड़ाते हैं, मरे का खाते हैं। याद रखो ! मृत्युभोज में जाना मरघट को घर लाने जैसा है और मृत्युभोज में खाना मुर्दे का मांस खाने जैसा।
- मुनिश्री तरुण सागर जी महाराज