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दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया नाटक "बर्फ" - लहर नाट्य मंच व कला रंग भारती ने विश्व रंगमंच दिवस पर किया कार्यक्रम



मेरठ - विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर मेरठ की प्रतिष्ठित संस्था लहर नाट्य मंच और राष्ट्रीय कला रंग भारती के संयुक्त तत्वाधान में प्रसिद्ध अभिनेता और लेखक सौरभ शुक्ला द्वारा रचित और अनुज शर्मा द्वारा निर्देशित चर्चित नाटक 'बर्फ़' का मंचन चौधरी चरण सिंह विश्विद्यालय, मेरठ के अटल सभागार में किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एल आई सी के प्रशासनिक अधिकारी श्री पी के खुराना व कार्यक्रम अध्यक्ष विवेक वशिष्ठ जी रहे ।
नाटक की कहानी: भ्रम या विश्वास
बर्फ़ एक हिंदी मनोवैज्ञानिक सस्पेंस नाटक है, जो कश्मीर की कड़ाके की ठंड में एक रात की कहानी दिखाता है। जिसमें एक डॉक्टर की मुलाकात एक स्थानीय टैक्सी ड्राइवर से होती है। घर कश्मीर के इलाके का है। बाहर बर्फ पड़ रही है। अंदर एक मां है। नाम है नफीसा। नफीसा मौन है। लेकिन मां के चेहरे को जानने के लिए भाषा या संवाद की जरूरत कब पड़ती है...घर हंस रहा है। हंसता हुआ यह अकेला घर है इस बस्ती में। घर तो बस्ती में और भी हैं, लेकिन बेरौनक-सा। बस्ती के दूसरे घर मर गए थे। सब लोग बस्ती छोड़कर नीचे घाटी में चले गए। रोज-रोज की गोलाबारी... कौन सहे? लेकिन रह गए गुलाम रसूल। रह गई उसकी पत्नी नफीसा।उनके पास अब उनका एक बेटा है। नाम है जिगरा, एक चाइनीज गुड्डा। गुलाम रसूल ने अपनी नि:संतान पत्नी की ममता को जीवित रखने के लिए एक 'चाइनीज़ गुड्डे' (जिगरा) को अपनी संतान के रूप में स्वीकार कर लिया है। कहानी में मोड़ तब आता है जब डॉक्टर सिद्धांत कौल, जो विज्ञान और तर्क में विश्वास रखते हैं,एक सेमिनार में भाग लेने कश्मीर पहुंचते हैं। डॉक्टर कौल की मुलाकात गुलाम से होती है। तभी फोन पर जिगरे के बीमार होने की खबर गुलाम को मिलती है। गुलाम, डॉक्टर कौल को लेकर रात के अंधेरे में अपने गांव...अपने घर पहुंचता है। डॉक्टर कौल अपने विज्ञान मन से जिगरे को देखता है। नफीसा ममता के मन से। गुलाम का मन, अपनी बीवी के मन के साथ है। आखिर डॉक्टर का मन बदलता है। उसे भी कबूल करना पड़ता है कि दर्द के अथाह समंदर में डुबे हुए लोगों के घरों को भी मोहब्बत का एक धागा बचाए रख सकता है और संसार का हर सच यकीन पर खड़ा होता है।
क्या 'जिगरा' महज़ एक खिलौना है या वह उन लाखों कश्मीरियों का सपना है जो अपने बिछड़े हुए घरों को आज भी याद करते हैं? क्या जिगरा सिर्फ कश्मीर में रहता है? यही इस नाटक का मुख्य आकर्षण रहा।
लहर नाट्य मंच' के निर्देशक अनुज शर्मा ने कश्मीर की इस कहानी को अपने बेजोड़ निर्देशन में निर्देशित कर दर्शकों अंदर तक झकझोर दिया। निर्देशक अनुज शर्मा ने बताया कि "यह नाटक केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि सत्य और यकीन के बीच की उस महीन रेखा को खोजने का प्रयास है, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। कश्मीर की राजनीति, आतंकवाद और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ पिरोना हमारे कलाकारों के लिए एक बड़ी चुनौती और उपलब्धि रही"। यह नाटक वैश्विक होते हुए भी हर उस इंसान की कहानी है जो अपने घर और अपनी जड़ों से प्यार करता है।
नाटक में गुलाम रसूल बने अनुज शर्मा, डॉक्टर सिद्धांत कौल बने सुधीर सनवाल और नफीसा बनी सीमा समर ने अंत तक दर्शकों को अपने अभिनय से बांधे रखा। संगीत एवं प्रकाश व्यवस्था विकास राज एवं क्षितिज तिवारी ने की। स्टेज मैनेजमेंट संभव एवं आशीष तोमर ने संभाला।
मंच संचालन कवि व रंगकर्मी मनमोहन भल्ला ने किया।
नाटक के दौरान कार्यक्रम के संयोजक श्री अनिरुद्ध गोयल, संस्था के अध्यक्ष श्री राजगोपाल कात्यायन एवं महामंत्री श्री प्रदीप अग्रवाल एवं श्री आलोक अग्रवाल क्षितिज तिवारी, संभव समर , विकास राज, आशीष तोमर शक्ति कुमार मनीष रस्तोगी संजीव कुमार का अमूल्य सहयोग रहा। कार्यक्रम के दौरान फिजिशियन डॉ राजकुमार अग्रवाल,एडको डेवलपर्स के श्री वरुण अग्रवाल, आर.एम. इंटरनेशनल के श्री विवेक वशिष्ठ आदि उपस्थित रहे।

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