“जनता को अंधेरे में रखकर चौपाल! क्या छुपाया जा रहा है पहाड़ी ब्लॉक में?”
मिर्जापुर (पड़री/पहाड़ी)।
विकासखंड पहाड़ी में प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को ग्राम सभा में आयोजित चौपाल कार्यक्रम को पूरी तरह गुपचुप तरीके से निपटा दिया गया। न तो इसकी कोई सार्वजनिक सूचना दी गई, न ही गांव में मुनादी कराई गई — जिससे आम ग्रामीण इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह अनजान रहे।
खास लोगों तक सीमित रही चौपाल
सूत्रों के मुताबिक, चौपाल में केवल अपने चहेते लोगों और कुछ मातहतों को बुलाकर औपचारिकता निभाई गई। जो ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे, उनकी शिकायतों को सुनना तो दूर, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
उच्च अधिकारी रहे गायब
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कोई भी जिम्मेदार उच्च अधिकारी मौजूद नहीं था। ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर सिर्फ खानापूर्ति करते हुए चौपाल का “निराकरण” कर दिया।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ कागजी रिकॉर्ड पूरा करने और वास्तविक समस्याओं को दबाने के लिए की गई। जब विकासखंड अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा — जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
बड़े सवाल
बिना सूचना के चौपाल क्यों आयोजित की गई?
जिम्मेदार अधिकारी मौके से गायब क्यों रहे?
क्या अनियमितताओं को छिपाने के लिए जानबूझकर यह खेल किया गया?
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर गांव में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बड़ा भ्रष्टाचार बनने की आशंका
यदि समय रहते इस मामले पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि बड़े भ्रष्टाचार का रूप ले सकता है।
“चौपाल जनता की समस्याओं का समाधान करने का मंच है, लेकिन पहाड़ी ब्लॉक में यह सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है। अगर जिम्मेदार अब भी नहीं जागे, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूटना तय है।”