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जमशेदपुर : चाकुलिया एयरबेस का रहस्य—जहां से जुड़ी है जापान पर हमले की कहानी, बहरागोड़ा में मिले बमों से खुला इतिहास का पन्ना

जमशेदपुर झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में स्थित चाकुलिया एयरबेस एक बार फिर सुर्खियों में है। बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा गांव में हाल ही में बरामद हुए शक्तिशाली बमों ने इस पूरे इलाके के द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े ऐतिहासिक महत्व को फिर उजागर कर दिया है। यह एयरबेस न केवल भारत, बल्कि विश्व इतिहास के सबसे निर्णायक युद्ध—द्वितीय विश्व युद्ध—का एक अहम गवाह रहा है।

परमाणु हमले से जुड़ा चाकुलिया का कनेक्शन

इतिहास के अनुसार, 6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए ‘लिटिल बॉय’ और ‘फैट मैन’ परमाणु बमों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। इन हमलों को अंजाम देने वाले अमेरिकी बी-29 सुपरफोर्ट्रेस बमवर्षक विमानों का सीधा संबंध झारखंड के चाकुलिया और धालभूमगढ़ एयरबेस से जुड़ा रहा है।

हालांकि अंतिम हमले प्रशांत महासागर के टिनियन द्वीप (मेरियाना द्वीप समूह) से किए गए थे, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इन विमानों की शुरुआती तैनाती, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सपोर्ट का प्रमुख केंद्र चाकुलिया और आसपास के एयरबेस ही थे। अमेरिकी वायु सेना की 58वीं एयर डिवीजन की गतिविधियों के प्रमाण आज भी इस क्षेत्र में मौजूद बताए जाते हैं।

क्यों चुना गया था चाकुलिया?

1942 में अंग्रेजों द्वारा बनाए गए चाकुलिया एयरबेस को बेहद गोपनीय रखा गया था। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण यह दुश्मनों की नजरों से सुरक्षित था।

उस समय जापान का दक्षिण चीन सागर पर नियंत्रण था, जिससे मित्र राष्ट्रों के लिए सप्लाई पहुंचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे में अमेरिकी विमानों को हिमालय के ऊपर से खतरनाक हवाई मार्ग—‘द हम्प’—के जरिए चीन तक रसद पहुंचानी पड़ती थी।

चाकुलिया इसी रणनीतिक ऑपरेशन का मुख्य केंद्र बना। 1944 के दौरान यह एयरबेस एशिया के सबसे व्यस्त सैन्य हवाई अड्डों में शामिल था, जहां से हथियार, ईंधन और सैनिकों की आवाजाही लगातार होती रहती थी।

बहरागोड़ा में मिले बमों ने खोली परतें

बहरागोड़ा के पानीपड़ा गांव में हाल ही में मिले शक्तिशाली बम इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह पूरा इलाका कभी युद्ध सामग्री और सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि चाकुलिया और धालभूमगढ़ एयरबेस के बीच का 20–25 किलोमीटर का इलाका द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ‘चीन-बर्मा-भारत थिएटर’ के अंतर्गत बेहद संवेदनशील और सक्रिय जोन था। यहां से मित्र राष्ट्रों की सेनाएं अपने अभियानों का संचालन करती थीं।

चीन से जापान तक हमले की रणनीति

जापान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए अमेरिकी बी-29 विमान चाकुलिया से उड़ान भरकर पहले चीन के एयरबेस तक पहुंचते थे। वहां ईंधन और रसद भरने के बाद जापान पर हमले किए जाते थे।

बाद में जब अमेरिका ने मेरियाना द्वीपों पर कब्जा कर लिया, तो इन विमानों को वहां शिफ्ट कर दिया गया, जहां से सीधे जापान पर निर्णायक और विनाशकारी परमाणु हमले किए गए।

इतिहास के गर्भ में छिपा चाकुलिया

आज चाकुलिया एयरबेस भले ही शांत और वीरान दिखाई देता हो, लेकिन इसकी जमीन में दफन इतिहास आज भी कई रहस्यों को समेटे हुए है। बहरागोड़ा में मिले बमों ने यह साफ कर दिया है कि यह क्षेत्र कभी युद्ध की आग में झुलस चुका है।

निष्कर्ष

चाकुलिया एयरबेस सिर्फ एक पुराना हवाई अड्डा नहीं, बल्कि विश्व इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक का मूक गवाह है। बहरागोड़ा में मिले बमों ने इस बात को फिर साबित कर दिया है कि झारखंड की यह धरती कभी वैश्विक युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा रही थी।

इतिहास के ये अवशेष न केवल अतीत की याद दिलाते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सीख और शोध का विषय हैं।

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