मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के जन्मदिन पर विशेष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जन्मदिन पर विशेष
मध्यप्रदेश के बेहतर भविष्य के शिल्पी है - मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
• स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह
मध्यप्रदेश, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली के रूप में विश्व विख्यात है। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम से शिक्षा प्राप्त कर भगवान श्रीकृष्ण ने न केवल लोक-कल्याण की दिशा दिखलाई, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, गौ- संवर्धन और सनातन संस्कृति के पालन-पोषण की जिम्मेदारी का आदर्श मार्ग भी हमें सिखलाया है। आज उसी पाथेय को संकल्प बनाकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के अभ्युदय नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार उन सभी मान बिन्दुओं के गौरव को पुनर्स्थापित कर शिक्षा के महत्व को प्रमुखता से आगे बढ़ा रही है। मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के जन्मदिन (25 मार्च) के अवसर पर उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।
आज यह कहते हुए गौरव महसूस होता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में विगत वर्षों में जो व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं, उनके दूरदर्शी नेतृत्व, सुदृढ़ नीति-निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन का प्रतिफल हैं। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि इन उपलब्धियों के केंद्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सशक्त मार्गदर्शन और शिक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता परिलक्षित होती है। स्कूल शिक्षा मंत्री के रूप में यह मेरे लिए गर्व का विषय है कि उनके नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था निरंतर सुदृढ़ होती हुई नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रही है। वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन को मिशन के रूप में लागू कर रहे हैं।
शिक्षा के लोकव्यापीकरण और प्रदेश के नौनिहालों के सुरक्षित व बेहतर भविष्य के लिए हाल ही में वित्तीय वर्ष 2026-27 के स्कूल शिक्षा के बजट में 11 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के विजन और उनकी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के लिए 11,444 करोड़ रुपये और माध्यमिक शिक्षा के लिए 7,129 करोड़ रुपये का प्रावधान कर बच्चों की मजबूत शैक्षणिक नींव को सुनिश्चित किया है। वहीं समग्र शिक्षा अभियान के लिए 5,649 करोड़ रुपये तथा 101 करोड़ रुपये की पाठ्य सामग्री यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी विद्यार्थी संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए। साथ ही, अशासकीय विद्यालयों की फीस के लिए 546 करोड़ रुपये तथा पीएम श्री योजना के लिए 530 करोड़ रुपये का प्रावधान शिक्षा को समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इसी तरह मध्यप्रदेश परिवहन विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में जनआकांक्षाओं के अनुरूप जनसुविधा, पारदर्शिता और आधुनिकता के साथ सशक्त बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। प्रदेश सरकार आमजन के सुरक्षित, सुगम और सुलभ आवागमन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2026-27 के बजट में परिवहन क्षेत्र के लिए 230 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बात का प्रमाण है। “मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा” के लिए 54 करोड़ रुपये का प्रावधान विशेष रूप से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों एवं विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। यह पहल न केवल आवागमन को सरल बनाएगी, बल्कि शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच को और अधिक सुदृढ़ करेगी। परिवहन सेवाओं के डिजिटलीकरण की बात करें तो वाहन रजिस्ट्रेशन, परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित सभी सेवाएं ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे प्रक्रियाएं पारदर्शी, त्वरित और जनहितकारी बनी हैं। विशेष परिस्थितियों के लिए प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण का गठन निर्णय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाता है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों को मोटरयान कर में पूर्ण छूट प्रदान की गई है। वहीं, पुराने वाहनों को स्क्रैप कर नए वाहन खरीदने पर कर में छूट देकर स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निस्संदेह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में परिवहन क्षेत्र में किए गए ये सुधार जनसुविधा को केंद्र में रखकर किए गए प्रभावी प्रयास हैं, जो मध्यप्रदेश को आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था की ओर अग्रसर कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा को केवल एक प्रशासनिक विषय न मानकर, प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला के रूप में स्थापित किया है। इसी सोच का परिणाम है कि शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ‘प्रवेशोत्सव’ जैसी अभिनव पहल के माध्यम से पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई। कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाकर नामांकन दर में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, वर्ष 2025-26 में कक्षा 1 में कुल नामांकन 19.6% बढ़ा, जबकि शासकीय विद्यालयों में यह वृद्धि 32.4% तक जा पहुंची है। इसके साथ ही ड्रॉपआउट दर में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज गई। प्राथमिक स्तर पर यह 6.8% से घटकर शून्य हो गई है। यह केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज में बढ़ते विश्वास और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।
शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के साथ ही विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत व्यापक स्तर पर लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 89,710 तथा 2025-26 में 94,300 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरित किए गए हैं। इसी तरह हजारों विद्यार्थियों को स्कूटी और लगभग 4.5 लाख विद्यार्थियों को साइकिल प्रदान की गई हैं। नवीन बजट में 250 करोड़ रुपये के लैपटॉप, 100 करोड़ रुपये की स्कूटी और 210 करोड़ रुपये की साइकिलों का प्रावधान यह दर्शाता है कि सरकार विद्यार्थियों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देते हुए प्रदेश के 3367 विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम तथा 690 विद्यालयों में कृषि संकाय प्रारंभ किए गए हैं, जिससे 6 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के परिणाम स्वरूप बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ, कक्षा 10वीं का परिणाम 56% से बढ़कर 87.52% और कक्षा 12वीं का 63% से बढ़कर 82.53% तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत 49 नई पाठ्य पुस्तकें हिंदी एवं स्थानीय भाषाओं में तैयार कर 89 जनजातीय विकासखंडों में वितरित की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन और वर्तमान की आवश्यकता के अनुरूप डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्तमान में 83.1 प्रतिशत हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में आईसीटी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं बड़ी संख्या में स्मार्ट क्लास स्थापित की जा चुकी हैं। एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्यम से 1 लाख विद्यालयों, 2.7 लाख शिक्षकों और 1.5 करोड़ विद्यार्थियों का एकीकृत डाटा तैयार किया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनी है।
शिक्षकों की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 76,325 अतिथि शिक्षकों की समय पर नियुक्ति की गई है। ‘हमारे शिक्षक’ जियो-टैग ऐप के माध्यम से 80% नियमित और 96% अतिथि शिक्षकों का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है। साथ ही अवकाश प्रबंधन और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएं भी प्रारंभ की गई हैं। वहीं, स्कूलों में बेहतर आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए पहली बार भवन मरम्मत, पेयजल और बिजली व्यवस्था के लिए विशेष निधि प्रदान की गई है। ये सभी प्रयास शिक्षा को समग्र, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
शिक्षा क्षेत्र के लिए अधोसंरचना विकास की बात हो या आधुनिक शिक्षा व्यवस्था की, विगत 2 वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए ऑनलाइन छात्रावास प्रबंधन प्रणाली, निजी विद्यालयों की मान्यता के लिए डिजिटल पोर्टल तथा 20 मंजिला आधुनिक कार्यालय भवन का निर्माण भी प्रस्तावित है। बीते दो वर्षों में 91 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण किया गया, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए केंद्र बनकर उभर रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में इन विद्यालयों के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। साथ ही, 4,233 करोड़ रुपये से शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों का निर्माण एवं उन्नयन किए जाने हैं, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक शिक्षण वातावरण मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का नेतृत्व मध्यप्रदेश के भविष्य को एक कुशल शिल्पी की तरह गढ़ रहा है। उनकी दूरदर्शी नीतियां संवेदनशील दृष्टिकोण और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन प्रदेश की सशक्त, समृद्ध नींव को मजबूती दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में हम प्रदेश के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को पूर्ण करते हुए मध्यप्रदेश की पावन धरा को ज्ञान, कौशल और नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए संकल्पित हैं।
एक बार पुनः मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को उनके जन्मदिवस पर शुभकामनाएं देता हूं और उनके सुखद, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
(लेखक – मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री हैं)
Dr Mohan Yadav CM Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
Uday Pratap Singh
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