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75 वर्षीय बुजुर्ग का इंतजार लंबा पड़ा भारी, सिलेंडर से पहले छूट गई जिंदगी, CPR देकर भी...see more

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से सामने आई यह खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी पीड़ा है जो सीधे दिल को चीर देती है। 75 वर्षीय मुख्तार अंसारी सुबह-सुबह अपने घर से निकले थे—बस एक गैस सिलेंडर लेने, ताकि घर की रसोई जलती रहे। लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि यह साधारण-सी जरूरत उनकी जिंदगी की आखिरी वजह बन जाएगी।

सुबह की हल्की ठंडक कब तेज धूप में बदल गई और उम्मीद कब थकान में, उन्हें खुद भी शायद एहसास नहीं हुआ। गैस एजेंसी की लंबी कतार में खड़े-खड़े वक्त गुजरता रहा, शरीर जवाब देता गया। करीब 9 बजे, अचानक घबराहट ने उन्हें जकड़ लिया और वह जमीन पर गिर पड़े—भीड़ के बीच, मगर बिल्कुल अकेले।

लोग दौड़े, मदद की कोशिश हुई, उन्हें तुरंत नर्सिंग होम ले जाया गया। लेकिन जिंदगी और मौत के बीच की दूरी उस दिन बहुत छोटी रह गई। अस्पताल के गेट पर ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक बुजुर्ग, जो सिर्फ अपने घर की जरूरत पूरी करने निकला था, वह लौटकर कभी घर नहीं आया। पीछे रह गईं यादें, एक टूटा हुआ परिवार, और कई ऐसे सवाल जिनका जवाब शायद किसी के पास नहीं है।

क्या एक गैस सिलेंडर के लिए इतनी जद्दोजहद जरूरी होनी चाहिए? क्या बुनियादी सुविधाएं इतनी दूर हो गई हैं कि उन्हें पाने की कीमत एक जिंदगी हो? यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है—कि कहीं न कहीं, हमारी व्यवस्था और संवेदनाएं दोनों ही कमजोर पड़ती जा रही हैं।

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