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महिला नेतृत्व से विकसित भारत 2047 की दिशा में वैश्विक मंथन बीपीएसएमवी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन, देश-विदेश के विद्वानों ने रखे विचार

खानपुर कलां, 25 मार्च।
भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय  खानपुर कलां,  के सामाजिक विज्ञान संकाय द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में “विरासत और क्षितिज का सामंजस्य: 2047 तक विकसित भारत के लिए महिला-नेतृत्व विकास” विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुदेश ने की। सम्मेलन की रूपरेखा सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो सुरेंद्र मोर ने रखी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मेक्सिको स्थित यूनिवर्सिडाड पानामेरिकाना के अर्थशास्त्र एवं व्यवसाय विज्ञान संकाय के प्रो. राजेश रंजन ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महिला नेतृत्व के महत्व को स्पष्ट करते हुए समावेशी विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. राम सिंह ने अपने विस्तृत और विचारोत्तेजक संबोधन में कहा कि—"यदि भारत को वास्तव में 2047 तक एक विकसित और समावेशी अर्थव्यवस्था बनना है, तो हमें अपनी आधी आबादी को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बनाना होगा। वर्तमान आर्थिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल सामाजिक न्याय का प्रश्न नहीं, बल्कि उत्पादकता, नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का मूल आधार है।"उन्होंने कहा कि "डेटा यह स्पष्ट करता है कि जिन देशों ने महिला श्रम भागीदारी, शिक्षा और नेतृत्व में निवेश किया है, वे अधिक तेज़ और संतुलित विकास की ओर अग्रसर हुए हैं। भारत के संदर्भ में हमें नीतिगत स्तर पर ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण करना होगा, जो महिलाओं को उद्यमिता, शोध और निर्णय-निर्माण में समान अवसर प्रदान करे।"इस अवसर पर महिला विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र खरल गुरुकुल की छात्रा आल इंडिया रैंक 366 प्राप्त यूपीएससी क्वालिफायर सुश्री स्वाति आर्या ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए अपने अनुभव साझा किए और निरंतरता, अनुशासन एवं आत्मविश्वास को सफलता की कुंजी बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सुदेश ने अपने संबोधन में कहा कि "विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समावेशन, लैंगिक समानता और ज्ञान-आधारित समाज के निर्माण से जुड़ा हुआ है। इस दिशा में महिला नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।"उन्होंने आगे कहा कि आज की युवा छात्राएं केवल शिक्षा प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि परिवर्तन की वाहक हैं। उन्हें शोध, नवाचार, उद्यमिता और नीति-निर्माण के क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार करना विश्वविद्यालय की प्राथमिक जिम्मेदारी है। बीपीएसएमवी निरंतर ऐसे शैक्षणिक और शोधपरक वातावरण का निर्माण कर रहा है, जो छात्राओं को आत्मनिर्भर और नेतृत्वक्षम बनाता है। इस अवसर पर यूपीएससी क्वालिफायर सुश्री स्वाति आर्या ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए अपने संघर्ष और सफलता की यात्रा साझा की।   समापन सत्र में डॉ. ज्ञान मेहरा ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस अवसर पर प्रो. निशा राणा एवं प्रो. नरेंद्र कुमार बिश्नोई ने महिला सशक्तिकरण के विविध आयामों पर अपने विचार रखे।समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव प्रो. शिवालिक ने छात्राओं को प्रेरित किया, जबकि डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. विजय नेहरा ने सम्मेलन के शैक्षणिक महत्व को रेखांकित किया।इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में देश भर से 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ शोध पत्रों की घोषणा कर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।अंत में संयोजक डॉ. दीपाली माथुर व सहसयोजक डॉ अंजू रानी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापित किया और सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सभी के सहयोग की सराहना की।
फोटो कैप्शन :- 01 स्वाति आर्य को सम्मानित करते कुलपति प्रो सुदेश , प्रो राम सिंह , प्रो राजेश रंजन व अन्य। 02 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते प्रो राम सिंह। 

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