धर्मांतरण के बाद SC/ST अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुनील कुमार राजपूत
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति अपनी मूल सामाजिक पहचान से जुड़े अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित संवैधानिक अधिकारों का दावा नहीं कर सकता। संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के दलितों को ही प्राप्त है।
न्यायालयों द्वारा समय-समय पर यह भी कहा गया है कि धर्म परिवर्तन के बाद भी पूर्व आरक्षण या विशेष अधिकारों का लाभ लेने का प्रयास संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है।
इस निर्णय को अनुसूचित जाति समाज की संवैधानिक व्यवस्था और पहचान की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे जबरन या लालच देकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर अंकुश लगेगा।