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धर्म परिवर्तन और SC/ST अधिकारों पर बहस तेज, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर उठी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं


नई दिल्ली:-सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्णय के बाद धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) से जुड़े अधिकारों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस फैसले के संदर्भ में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक वर्गों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा मुख्य रूप से हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को दिया गया है। इसी प्रावधान को आधार बनाते हुए यह तर्क दिया जाता रहा है कि धर्म परिवर्तन के बाद इस श्रेणी से जुड़े लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

हालिया फैसले के बाद कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने इसे धर्मांतरण पर रोक लगाने और पारंपरिक सामाजिक संरचना की रक्षा की दिशा में अहम कदम बताया है। उनका कहना है कि आरक्षण और अन्य संवैधानिक सुविधाएं उन समुदायों के लिए हैं, जो ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, कई सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह विषय संवेदनशील है और इसमें व्यापक कानूनी व सामाजिक पहलुओं पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है। उनका कहना है कि धर्म परिवर्तन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

इस पूरे मुद्दे ने एक बार फिर अनुसूचित जनजाति से जुड़े अनुच्छेद 342 में संभावित संशोधन की मांग को भी चर्चा में ला दिया है। कुछ वर्गों का कहना है कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

फिलहाल, इस विषय पर अंतिम कानूनी स्थिति और संभावित नीतिगत बदलाव को लेकर देशभर की नजरें केंद्र सरकार और न्यायपालिका पर टिकी हुई हैं।

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