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जमशेदपुर: बूंद-बूंद को तरसा बागबेड़ा, खाली बाल्टी और जरकिन लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं; 10 साल से अधूरी है जलापूर्ति योजना

जमशेदपुर: गर्मी की दस्तक के साथ ही लौहनगरी के बागबेड़ा इलाके में जल संकट गहराने लगा है। पानी की किल्लत से आक्रोशित बागबेड़ा वासियों ने सोमवार को गांधीनगर और पोस्तोनगर की गलियों में जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में खाली बाल्टियां और प्लास्टिक के जरकिन लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाओं ने प्रशासन और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

महिलाओं का फूटा गुस्सा: “कब मिलेगा घर-घर पानी?”

प्रदर्शन में मुख्य रूप से स्थानीय महिलाएं शामिल हुईं, जिनका कहना है कि हर साल गर्मी में उन्हें पानी के लिए कोसों दूर भटकना पड़ता है या महंगे दामों पर टैंकर मंगवाने पड़ते हैं।
चापाकल सूख रहे हैं और पाइपलाइन का काम अब तक अधूरा है। महिलाओं ने बताया कि घर का काम छोड़ उन्हें घंटों पानी के इंतजाम में समय बर्बाद करना पड़ता है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

10 साल का इंतजार: ‘बागबेड़ा वृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजना’ अब तक अधूरी

प्रदर्शनकारियों ने विभागीय सुस्ती पर सवाल उठाते हुए कहा कि बागबेड़ा वृहद ग्रामीण जलापूर्ति योजना पिछले 10 वर्षों से निर्माणाधीन है। फंड की कमी, तकनीकी अड़चनें और ठेकेदारों की लापरवाही के कारण यह महत्वाकांक्षी योजना एक दशक से केवल फाइलों और आधे-अधूरे ढांचों तक सीमित है।पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के इंजीनियरों का दावा है कि इस गर्मी के समाप्त होने तक योजना का काम पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, स्थानीय लोग अब इस ‘दिलासे’ पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

पेयजल स्वच्छता विभाग की चुनौती

गर्मी बढ़ने के साथ ही बागबेड़ा, घाघीडीह और आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। यदि विभाग जल्द ही जलापूर्ति शुरू नहीं करता है, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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