logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

उसपार

मै उसपार जाना चाहता हूं, लेकिन चाहने से क्या होता है, चले तो नहीं गये न? क्योंकि आप चाहते हैं लेकिन जा नहीं पा रहे हैं। लेकिन मैं बताता हूं कि आप उसपार कैसे जायेगे। इसके लिए आपको सबसे पहले "उसपार" शब्द का मतलब समझना या समझना होगा, खुद से, अपनो से, गैरो से, दुश्मनों से। इस चार दिन की जिंदगानी में इन्हीं चार लोगों से मुलाकात होती रहती है इसलिए मेरे समझ में जो आ रहा है वह है " उसपार" शब्द का सीधा सा अर्थ होता है किसी समस्या से बाहर निकल जाना" और " चाहता हू " का मतलब यह हुआ कि आप निकलना चाहते हैं लेकिन निकल नहीं पा रहे हैं और किसी दूसरे आदमी से यह कैह रहे हैं और दूसरा आदमी आपके समस्या को सुनकर आपके जीवन के बारे में अनुमान और विश्लेषण करता है कि यह अपने समस्या से उसपार हो सकते हैं कि नहीं, अगर हो सकते हैं तो वह आदमी आपको देखकर मुस्कुरा देता है और नहीं तो, कुछ सलाह या जैसी जरूरत पड़ती है उस तरह का मदद इंसान कर देता है अगर वह अच्छे स्वभाव का है तो। इसी पर एक कहानी आप को सुनाते हैं तब आपको लगेगा की असल जिंदगी में भी ऐसा ही होता है।
एक बालक भरी दोपहरी में सुनसान, गहरे, चौड़े और बहते नदी के किनारे पर आगे जाता, पीछे जाता और रुक रुक कर नदी को निहारता रहता फिर आगे पीछे होता, लम्बी सांसे लेता और परेशान होता, पर उसपार जाने की चाहत रखता। इसी बीच एक आदमी ने देखा कि लड़का घंटों से परेशान है शायद उसपार जाना चाहता है, इसी ख्याल को लेकर वह इंसान बच्चे के पास गया और कहा उसपार जाना है क्या? उसपर बच्चे ने सर हिला कर हामी भर दिया तब इंसान ने बालक से कहा चलो मैं पार करा देता हूं। उस इंसान ने बच्चे को नदी के उसपार करा करा दिया और वापस जाने लगा। लेकिन बच्चा भी संस्कारी था उसने पार होते ही धन्यवाद ज्ञापित किया और पूछा कि आपको भी इस पार कुछ काम था क्या? तो उस आदमी ने जवाब दिया नहीं मैं तो तुम्हे उसपार कराने आया था फिर मैं आपस चला जाऊंगा। उस बच्चे को यह बात सुनकर अजीब सा लगा और सोचा की जिन्दगी में ऐसा भी होता है क्या कि कोई इंसान बिना कारण बिना लाभ के किसी को सहायता करने के लिए अपना पूरा समय व्यतीत कर देता है। यह बात बच्चे को पलक झपटते ही परेशान करने लगा और अपने आपको रोक नहीं पाया तथा उस इंसान से यही बात उसने पूछ दिया। तब इन्सान ने कहा कि देखो बच्चे मै काफी देर से देख रहा था कि तुम उसपार जाने के लिए बार बार नदी के गहरे पानी को देख रहे थे मुझे लगा कि तुम अब अकेले ही नदी में प्रवेश कर दोगे इसलिए मैं आगया तुम्हें उसपार कराने के लिए क्योंकि तुम इस गहरे नदी से उसपार नहीं जा सकते थे और अनहोनी का खतरा था । इसमें मेरा सोच यही था कि तुम भी मेरे बच्चे जैसा किसी के बच्चे होगे और कुछ अनहोनी होने पर जितना दुख तुम्हारे माता पिता को होता उतनाही दुख मुझे भी होता, तब बच्चे ने कहा कि आप ठीक बोल रहे हैं मैं यही देख रहा था कि नदी का कौन सा पानी नदी के उसपार की तरफ जा रही है उसी में मैं छलांग लगा देता और अपने आप कुछ देर और दूरी पर उस किनारे पहुंच जाता। लेकिन आपके साथ पार करने से यह महसूस किया कि इस गहरे पानी में एक मजबूत स्तंभ की जरूरत है। नहीं तो मैं उसपार नहीं पहुंचा पाता। तब उस इंसान ने कहा कि देखो बच्चे जीवन में अकेले चलो ये अच्छी बात है लेकिन जहां जा रहे हो उस रास्ते के चप्पे चप्पे का तुम्हें ज्ञान होना चाहिए और मंजिल तक पहुंचने के लिए उतनी ताकत, ज्ञान, हौसला, सामर्थ्य होने के साथ अनहोनी होनी, होनी से निपटने का संसाधन के साथ सहयोग की गुंजाइश भी खुला रखना चाहिए, तभी मंजिल का जीत सुनिश्चित हो सकेगी। देखो आज से 20 साल पहले तुम्हारी तरह मेरा भी एक बच्चा उसपार जाने का जिज्ञासा लिए नदी में गया और वापस नहीं आ पाया, तबसे आज तक मैं रोज नदी के किनारे पर आता हूं और सबको उसपार इस उम्मीद से पार करता हूं कि वापस आते समय कोई इंसान मेरे बच्चे को साथ लेकर आयेगा, अब 20 साल से ऊपर हो गया है लेकिन मैं अपना उम्मीद और प्रयास और लोगों का सहायता करना नहीं छोड़ा हू, उम्मीद है तुम भी उपरोक्त बातों को गौर कर के उस पर अमल करोगे।
सप्रेम धन्यवाद
🙏❤️🌹🎉

0
0 views

Comment