सेंवई सिर्फ एक बहाना होती है… असल मकसद होता है दिलों को जोड़ना, गले मिलना, रिश्तों को और मज़बूत बनाना।
कलीम सिद्दीकी।
ईद का मुबारक मौका… गांव की गलियों में खुशियों की रौनक, हर घर से उठती सेंवई की खुशबू, लेकिन सच कहा जाए तो ये सेंवई सिर्फ एक बहाना होती है… असल मकसद होता है दिलों को जोड़ना, गले मिलना, रिश्तों को और मज़बूत बनाना।
ईद हमें सिर्फ खुशी मनाना नहीं सिखाती, बल्कि ये भी सिखाती है कि जिनके अपने इस दुनिया से रुख़्सत हो चुके हैं, उनके पास जाकर उन्हें एहसास दिलाया जाए कि वो अकेले नहीं हैं। उनके साथ कुछ पल बैठना, उनका हाल पूछना—यही तो असली ईद है, यही असली इंसानियत है।
इसी खूबसूरत सिलसिले में आज दोस्त और साथी—जो अब “सेठ (सुनार)” की नई उपाधि से भी नवाज़े जा चुके हैं—नौशाद भाई ने बुलाकर दिल खोलकर मेहमाननवाज़ी की। क्या शानदार खातिरदारी थी! और ऊपर से उनका खास अंदाज़… स्पेशल फालूदा का ऐसा स्वाद चखाया कि दिल भी खुश हो गया और रूह भी तरोताज़ा हो गई।
गले मिलना, हंसना-बतियाना, पुरानी यादें ताज़ा करना—यही तो वो पल होते हैं जो ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।
और ये भी कहना गलत नहीं होगा कि नौशाद भाई में जो यह खुशनुमा बदलाव आया है, उसमें उनके अज़ीज़ दोस्त और सहपाठी शहजाद खान का बड़ा योगदान है—इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अच्छे दोस्तों का असर इंसान की शख्सियत को और निखार देता है।
खैर… दिल से शुक्रिया उन मोहब्बतों का, उस अपनापन का, जो हर बार दिल जीत लेता है।
ईद मुबारक तो हो ही चुकी…
लेकिन आज के दिन कहना बनता है — “बासी मुबारक” 😄❤️
क्योंकि असली ईद तो वही है, जो दिलों में लंबे समय तक ज़िंदा रहे…
और ये मोहब्बतें यूं ही कायम रहें। 🤲✨