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नया उपन्यास शीर्षक - नेता जी लेखक दलपत सिँह



यह उपन्यास एक साधारण किसान परिवार से उठकर राजनीति के शिखर तक पहुँचने वाले नेता की जीवन-यात्रा को दर्शाता है। कहानी में सत्ता की लालसा, मित्रता, विश्वासघात, नैतिक संघर्ष और व्यक्तिगत भावनाओं का गहरा चित्रण किया गया है।

मुख्य पात्र कोमल सिंह (नेताजी) अपने छात्र जीवन से राजनीति में प्रवेश करता है और संघर्ष करते हुए एक प्रभावशाली नेता बनता है। उसके जीवन में साश्वत सिंह जैसे मित्र, मंगल सिंह जैसे प्रतिद्वंद्वी और तपस्या जैसी प्रेमिका महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कहानी का केंद्र केवल राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे निर्णयों की कीमत और उनका पश्चाताप है। विशेष रूप से तपस्या और उसके पुत्र के साथ किया गया अन्याय अंत में नेताजी के आत्मग्लानि का कारण बनता है, जिसे वह मृत्यु से पहले सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता है।

यह उपन्यास राजनीति के बाहरी चमक-दमक से अधिक उसके अंदर के संघर्ष, मानवीय कमजोरियों और सत्य की शक्ति को उजागर करता है।


लेखक परिचय

दलपत सिंह एक भारतीय लेखक हैं, जिन्हें समाज, राजनीति और मानवीय संबंधों के गहन चित्रण के लिए जाना जाता है। उनके लेखन में वास्तविक जीवन के अनुभवों और सामाजिक परिस्थितियों की स्पष्ट झलक मिलती है।

वे अपनी रचनाओं के माध्यम से केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि पाठकों को सोचने और अपने समय को समझने के लिए प्रेरित करते हैं। राजनीति, समाज और मानवीय मनोविज्ञान उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं।

उनका उपन्यास “नेताजी: सत्ता, सत्य और पश्चाताप” इन्हीं विषयों पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है, जिसमें उन्होंने सत्ता, संघर्ष, आदर्श और मानवीय कमजोरियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।


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