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शिक्षा जगत में बड़े बदलाव की आहट: महाराष्ट्र में 'समूह स्कूल' और पारदर्शी शिक्षक भर्ती पर मुहर

मुंबई | विशेष संवाददाता महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग में बुनियादी सुधारों और शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। 18 मार्च को हुई इस बैठक में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने और 'ग्रुप स्कूल' (समूह स्कूल) की अवधारणा को धरातल पर उतारने के संकेत दिए गए हैं।
​प्रमुख घोषणाएं:
स्कूलों का विस्तार और सुदृढ़ीकरण
​बैठक को संबोधित करते हुए स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रणजितसिंह देओल ने राज्य की नई कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
​समूह स्कूलों की स्थापना:
जिला परिषद के केंद्रीय स्कूलों को अब 'समूह स्कूलों' (Group Schools) में रूपांतरित करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि संसाधनों का अधिकतम लाभ छात्रों को मिल सके।
​10वीं तक विस्तार:
जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या (पटसंख्या) संतोषजनक है, वहां कक्षा 10वीं तक के वर्ग जोड़ने के लिए सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी
​पारदर्शी शिक्षक भर्ती: प्रधान सचिव ने आश्वासन दिया कि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाएगी। रोस्टर प्रमाणीकरण और पोर्टल के माध्यम से नियुक्तियां सुनिश्चित की जाएंगी, ताकि केवल योग्य और पात्र उम्मीदवारों को ही अवसर मिले।
​प्रशासन और संगठन के बीच गहन चर्चा
​मंत्रालय में आयोजित इस बैठक में कास्ट्राईब शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षकों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से रखा। बैठक में शासन की ओर से उपसचिव आबासाहेब कवळे, शिक्षा संचालक महेश पालकर (पुणे), उपसंचालक राजेश कंकाळ (मुंबई) और कक्ष अधिकारी संगीता श्राफ उपस्थित रहीं।
​संगठन की ओर से महासचिव सुरेश तांबे, सरचिटणीस सतीश कांबळे, कार्याध्यक्ष बी. डी. धुरंधर सहित मुख्य संघटन सचिव परशराम गोंडाणे और अन्य पदाधिकारियों ने चर्चा में भाग लिया।
​निष्कर्ष: शिक्षा के नए युग की शुरुआत
​इस बैठक से स्पष्ट हो गया है कि सरकार अब केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को दोषमुक्त करने पर ध्यान दे रही है। 'समूह स्कूल' का मॉडल भविष्य में राज्य की शिक्षा प्रणाली की रीढ़ साबित हो सकता है।
​संपादकीय टिप्पणी:
यह कदम न केवल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की संभावनाओं को भी खत्म करेगा।

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