राजेश बिरला ने किया “कोटा लैंड बैंक” पुस्तक का विमोचन
कोटा/कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) के अंतर्गत उपलब्ध भूमि संपदा के व्यापक अध्ययन पर आधारित पुस्तक “कोटा लैंड बैंक विश्लेषण और अवसर” का विमोचन राजस्थान रेडक्रॉस सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष, कोटा नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष तथा माहेश्वरी समाज कोटा के अध्यक्ष राजेश बिरला द्वारा किया गया।
इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के देवेन्द्र सिंह चौहान, अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के जिला कोटा महामंत्री रमेशचंद्र गोयल, राजीव गांधी नगर ऑक्सीजोन विकास समिति के अध्यक्ष प्रतीक गोयल, महासचिव हिम्मत सिंह ‘बालूपा’, सह कोषाध्यक्ष राकेश अग्रवाल, युवा उद्यमी अनुपम गुप्ता, उद्यमी विशाल वर्मा , राधेश्याम मित्तल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस पुस्तक का लेखन एवं संपादन केडीए के राजस्व सलाहकार परमानन्द गोयल द्वारा किया गया है। यह उनकी आठवीं पुस्तक है। इससे पूर्व वे “संसद विजिट – यादें”, “पांच साल बेमिसाल”, “कोटा टूरिज्म – विजिट कोटा यादगार कोटा”, “विचारों की उड़ान” तथा “हाड़ौती गौरव सम्मान 2026” जैसी पुस्तकों का लेखन एवं संपादन कर चुके हैं।
पुस्तक में केडीए के अंतर्गत उपलब्ध रिक्त भूखण्डों एवं भूमि संपदा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। इसमें न केवल भूखण्डों का विवरण दिया गया है, बल्कि उनके सर्वोत्तम उपयोग, आवंटन, पुनः आवंटन तथा नीलामी से संबंधित व्यावहारिक सुझाव भी शामिल किए गए हैं। साथ ही, आमजन को जागरूक करने हेतु केस स्टडी एवं दृष्टांत भी दिए गए हैं।
पुस्तक में भूमि उपयोग से जुड़े नवाचारों और संभावनाओं को रेखांकित किया गया है। इसके अतिरिक्त, जन सामान्य के लिए उपयोगी एफएक्यू (फ्रीक्वेंटली एस्केड क्वेशंस- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) भी शामिल किए गए हैं, जिससे भूखण्ड क्रय, आवंटन या पुनर्विक्रय से संबंधित निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
लेखक परमानन्द गोयल के अनुसार, पुस्तक में लगभग आठ हजार से अधिक भूखण्डों से संबंधित सूचनाओं का संकलन किया गया है, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 2900 करोड़ रुपये आंकी गई है। उन्होंने बताया कि यदि इन भूखण्डों का सुनियोजित उपयोग, विक्रय एवं नीलामी की प्रक्रिया अपनाई जाए, तो आगामी तीन वर्षों में लगभग 1000 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जा सकता है, जिससे जन आकांक्षाओं की पूर्ति संभव होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुस्तक में दी गई जानकारी उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है, अतः अंतिम स्थिति के लिए प्राधिकरण के अभिलेख एवं भौतिक सत्यापन को आधार माना जाना आवश्यक होगा।
पुस्तक में विज़न डॉक्यूमेंट के रूप में हाड़ौती क्षेत्र के समेकित विकास हेतु त्रि-कोरिडोर मॉडल भी प्रस्तुत किया गया है।
यह पुस्तक नीति-निर्माताओं, प्रबंधकीय अधिकारियों, शहरी योजनाकारों, तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों, उद्यमियों तथा आम नागरिकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी और कोटा के योजनाबद्ध विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में स्थापित होगी।
पुस्तक में भूमि प्रबंधन की चुनौतियों, अनटोल्ड एसेट्स, भविष्य की संभावनाओं तथा संपत्ति क्रय-विक्रय के मनोविज्ञान पर आधारित शोध को भी शामिल किया गया है