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​जौनपुर सदर में 'पोस्टर वॉर' से मची खलबली: क्या कांग्रेस के खाते

जौनपुर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। जौनपुर की सदर विधानसभा सीट, जो हमेशा से हाई-प्रोफाइल रही है, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है—शहर की दीवारों पर चस्पां पोस्टर और सपा-कांग्रेस गठबंधन की अंदरूनी सुगबुगाहट।
​🚩 पोस्टर में 'मुस्कान', पर अंदरखाने 'टेंशन'
​कांग्रेस के पूर्व विधायक नदीम जावेद की क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता और हालिया पोस्टरों ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है। इन पोस्टरों की खास बात यह है कि इनमें कांग्रेस नेताओं के साथ-साथ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव की तस्वीरें भी प्रमुखता से लगाई गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे गठबंधन की "हरी झंडी" के तौर पर देखा जा रहा है।
​📍 क्या है 27 सीटों का फॉर्मूला?
​विश्वस्त सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के बीच हुई हालिया बैठकों में प्रदेश की करीब 27 सीटों पर कांग्रेस को तैयारी करने के संकेत मिले हैं। चर्चा है कि इन 'चुनिंदा' सीटों में जौनपुर सदर भी शामिल है। यही कारण है कि नदीम जावेद की टीम ने ईद और नवरात्र की शुभकामनाओं के बहाने अभी से जमीनी घेराबंदी शुरू कर दी है।
​सपा के स्थानीय दिग्गजों में बेचैनी
​इस नए समीकरण ने समाजवादी पार्टी के उन स्थानीय मुस्लिम नेताओं की नींद उड़ा दी है, जो लंबे समय से इस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत मानकर चल रहे थे।
​सीमित राजनीति का संकट: चर्चा है कि कई नेता केवल "चीफ के करीबी" होने के दावों और चायखानों की बैठकों तक सीमित रह गए, जबकि नदीम जावेद ने जमीनी जनसंपर्क में बढ़त बना ली है।
​भविष्य पर सवाल: अगर यह सीट गठबंधन में कांग्रेस के पाले में जाती है, तो सपा के टिकटार्थियों को या तो संगठन में नई भूमिका स्वीकार करनी होगी या फिर किसी अन्य क्षेत्र की ओर रुख करना पड़ेगा।
​विश्लेषकों की नजर
​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जौनपुर सदर सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होगा। यदि गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो यह देखना चुनौतीपूर्ण होगा कि सपा के कार्यकर्ता कांग्रेस प्रत्याशी के साथ कितनी मजबूती से खड़े होते हैं। फिलहाल, 2027 की चुनावी बिसात पर पहली चाल चली जा चुकी है।

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