प्लास्टिक कचरा मुक्त अभियान की निकली हवा, मोहनगढ़ में जगह-जगह पसरा कचरा :-
- - - - - - - नालियां अवरुद्ध, गंदगी से परेशान ग्रामीण; कागजों में स्वच्छता के दावे, पंचायत समिति के प्रमाण पत्र पर उठे सवाल :- - - - - - - -
मोहनगढ़ (जैसलमेर) - स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 16 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलाए गए प्लास्टिक कचरा मुक्त अभियान की जमीनी हकीकत इसके दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। पंचायत समिति मोहनगढ़ के अधीन 19 ग्राम पंचायतों में अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरा हटाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता में ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अब भी प्लास्टिक कचरे के ढेर साफ दिखाई दे रहे हैं। पंचायत समिति मुख्यालय मोहनगढ़ में ही हालात चिंताजनक बने हुए हैं। मुख्य बाजार और गलियों में जगह-जगह प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा है, जिससे नालियां अवरुद्ध हो रही हैं। नालियों का गंदा पानी सड़कों पर फैलने से आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंदगी के कारण मक्खियों और मच्छरों की संख्या बढ़ रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वच्छता के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। बजट खर्च दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। पंचायत समिति मुख्यालय पर ही जब यह स्थिति है, तो अन्य ग्राम पंचायतों की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रमाण पत्र बना चर्चा का विषय :- - - - - पंचायत समिति मोहनगढ़ द्वारा दिनांक 18 मार्च 2026 को जारी किया गया प्रमाण पत्र इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। इस प्रमाण पत्र में दावा किया गया है कि सभी 19 ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक कचरे को पूरी तरह साफ कर निस्तारित कर दिया गया है और कहीं भी कचरा शेष नहीं है। यह प्रमाण पत्र ग्राम विकास अधिकारियों द्वारा दिए गए प्रमाण पत्र के आधार पर पंचायत समिति मोहनगढ के विकास अधिकारी नाथू सिंह द्वारा जारी किया गया है। हालांकि जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। कस्बे और गांवों में फैली गंदगी और प्लास्टिक कचरे के ढेर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने अभियान की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और सफाई व्यवस्था में सुधार की मांग की है।