भारत में प्रीमियम पेट्रोल महंगा, थोक डीजल ₹22 प्रति लीटर तक बढ़ा। कच्चे तेल की कीमत $119 प्रति बैरल पार; आम जन को राहत, रेगुलर पेट्रोल के दाम स्थिर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के ईंधन बाजार पर दिखने लगा है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने शुक्रवार से प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में ₹2 से ₹2.35 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। वहीं औद्योगिक उपयोग के लिए बेचे जाने वाले थोक डीजल की कीमतों में करीब ₹22 प्रति लीटर का उछाल दर्ज किया गया है।
प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़े:
देश की प्रमुख तेल कंपनियों—बीपीसीएल, एचपीसीएल और आईओसीएल—ने अपने प्रीमियम पेट्रोल ब्रांड्स के दाम बढ़ाए हैं।
• बीपीसीएल का Speed
• एचपीसीएल का Power
• आईओसीएल का XP95
इन ईंधनों की कीमतों में ₹2.09 से ₹2.35 प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है।
शहरों में नई कीमतें:
बढ़ोतरी के बाद कुछ प्रमुख शहरों में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें इस प्रकार हैं:
✓ लखनऊ: ₹103.92 प्रति लीटर
✓ पुणे: ₹113.77 प्रति लीटर
(स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में अंतर संभव)
वैश्विक कारण:कच्चा तेल महंगा -
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव, खासकर ईरान से जुड़े घटनाक्रम, के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत $119 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
रेगुलर पेट्रोल पर कोई असर नहीं:
तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल प्रीमियम पेट्रोल तक सीमित है। रेगुलर पेट्रोल (91 ऑक्टेन) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत बनी हुई है।
प्रीमियम पेट्रोल क्या है?
प्रीमियम पेट्रोल में ऑक्टेन संख्या अधिक (95 या उससे ऊपर) होती है, जिससे यह हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के लिए उपयुक्त होता है। यह इंजन की क्षमता और स्मूदनेस को बेहतर बनाता है। इसका उपयोग आमतौर पर स्पोर्ट्स बाइक, लग्जरी कारों और टर्बो इंजन वाले वाहनों में किया जाता है।
आर्थिक असर और सवाल:
थोक डीजल की कीमतों में ₹22 की वृद्धि से परिवहन और उद्योगों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे महंगाई पर दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञ यह भी सवाल उठा रहे हैं कि वैश्विक कीमतें घटने पर उपभोक्ताओं को समान अनुपात में राहत क्यों नहीं मिलती।
निष्कर्ष:
हालांकि फिलहाल यह बढ़ोतरी सीमित दायरे में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रहने पर भविष्य में आम उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।