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कुदरत का कहर: बढ़नी क्षेत्र में तेज हवा के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जनपद के बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम ढेकहरी बुजुर्ग, ढेबरुआ, तुलसियापुर समेत दर्जनों गांवों में शुक्रवार को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई।
बारिश के साथ कई स्थानों पर हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। खेतों में बिछी सफेद ओलों की चादर ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं।
फसलों को भारी नुकसान, लागत निकलना भी मुश्किल
इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, सरसों और दलहन की फसलों को हुआ है। ओलों की मार से सरसों की फलियां टूटकर खेत में गिर गई हैं, वहीं तेज हवा के कारण गेहूं की खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है। किसानों का कहना है कि फसलें कटाई के करीब थीं, लेकिन इस दैवीय आपदा ने उनकी साल भर की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है।
किसानों की दर्दभरी दास्तां
क्षेत्र के प्रभावित किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर और कड़ी मेहनत कर फसल तैयार की थी। "हमें उम्मीद थी कि इस बार पैदावार अच्छी होगी और परिवार का भरण-पोषण हो सकेगा, लेकिन कुदरत के इस कहर ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब बीज और खाद की लागत निकलना भी नामुमकिन लग रहा है।"
प्रशासन से मुआवजे की गुहार
ग्रामीणों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए। किसानों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि फसल बीमा योजना और दैवीय आपदा राहत कोष के तहत उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाए, ताकि वे इस भारी आर्थिक संकट से उबर सकें।

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