बहरीन में युद्ध जैसे हालात के बीच फंसी प्रियंका पाठक सकुशल लौटीं, 12 लाख खर्च कर परिवार संग पहुंचीं तिलहर
शाहजहांपुर
तिलहर। इजराइल-ईरान तनाव के दौरान बहरीन में फंसी भाजपा नेता संजय पाठक की बेटी प्रियंका पाठक अपने पति और बच्चों के साथ सकुशल तिलहर लौट आई हैं। करीब 15 दिनों तक परिवार ने भय और अनिश्चितता के माहौल में बेसमेंट में शरण लेकर समय बिताया। सुरक्षित वापसी के लिए परिवार को भारी आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ा।
भाजपा नेता संजय पाठक, जो तिलहर चीनी मिल में हेड कैशियर पद से वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त हुए हैं, ने बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से भी मदद की गुहार लगाई थी। परिजनों के अनुसार, प्रियंका के सुरक्षित लौटने से पूरे परिवार और क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है।
प्रियंका पाठक ने बताया कि फरवरी में एक मॉडलिंग शूट के दौरान उनके लोकेशन से करीब एक किलोमीटर दूर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद हालात अचानक बिगड़ गए। धमाके की आवाज सुनते ही उन्होंने तुरंत अपने पति अनुज मिश्रा को फोन कर सतर्क किया और खुद किसी तरह कार से घर पहुंचीं। रास्ते में कई जगह धमाकों की आवाजें आ रही थीं और लोग दहशत में इधर-उधर भाग रहे थे।
उन्होंने बताया कि घर पहुंचने के बाद भी खतरा कम नहीं हुआ। एक दिन खिड़की के सामने ड्रोन दिखाई दिया, जिससे घबराकर उन्होंने तुरंत परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का निर्णय लिया। हालात बिगड़ने पर उन्हें अन्य लोगों के साथ एक सुरक्षित बेसमेंट में शिफ्ट किया गया, जहां कई भारतीय परिवार भी मौजूद थे।
प्रियंका के अनुसार, “हमले रुकने पर ही हम घर जाकर खाना बनाते और फिर तुरंत बेसमेंट लौट आते थे।” रमजान के दौरान सुबह और शाम कुछ समय के लिए हमले थम जाते थे, उसी दौरान जरूरी काम निपटाए जाते थे। सुरक्षा कारणों से लिफ्ट का इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया था, क्योंकि धमाकों के बीच उसमें फंसने का खतरा बना रहता था।
उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब पूरा परिवार 36 घंटे तक कार में ही रहने को मजबूर हो गया। खाने-पीने का सामान सीमित था और हर पल खतरे का डर बना हुआ था। बाद में उन्हें एक सुरक्षित बेसमेंट में शिफ्ट किया गया, जहां उन्होंने करीब 15 दिन गुजारे।
स्थिति कुछ सामान्य होने पर परिवार को सड़क मार्ग से सऊदी अरब पहुंचाया गया। वहां से सोमवार को वे मुंबई पहुंचे और मंगलवार सुबह करीब 9 बजे तिलहर स्थित अपने घर सकुशल पहुंच गए।
प्रियंका के पति अनुज मिश्रा, जो एसटीसी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, ने बताया कि सामान्य दिनों में भारत आने का हवाई किराया करीब 25 हजार रुपए होता है, लेकिन संकट के समय एक टिकट के लिए करीब साढ़े तीन लाख रुपए तक चुकाने पड़े। पूरे परिवार की वापसी में लगभग 12 लाख रुपए खर्च हुए।
अनुज ने बताया कि गल्फ एयरवेज और इंडियन एयरवेज ने फंसे लोगों को निकालने में मदद की। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि खाड़ी देशों में अभी भी फंसे भारतीयों को जल्द सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जाए।
परिवार के सकुशल लौटने पर परिजनों और क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है और सभी ने राहत की सांस ली है।