मड़ियाहूं: सांसद प्रिया सरोज ने जनता के बीच पहुंचकर सुनी समस्याएं; शिक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
मड़ियाहूं (जौनपुर): अपनी सक्रिय कार्यशैली और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए पहचानी जाने वाली सांसद प्रिया सरोज ने आज मड़ियाहूं विधानसभा क्षेत्र का सघन दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जनसंपर्क, औचक निरीक्षण और शोक संवेदनाओं के माध्यम से क्षेत्र की जनता के साथ गहरा संवाद स्थापित किया।
दुख की घड़ी में परिवार को दिया सहारा
सांसद सबसे पहले ग्राम पाली पहुँचीं, जहाँ उन्होंने स्व० बांकेलाल सरोज जी के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि "स्व० बांकेलाल जी का जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है और हम हर कदम पर परिवार के साथ खड़े हैं।"
शिक्षा पर जोर: मेहंदीगंज विद्यालय का औचक निरीक्षण
क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए सांसद ने मेहंदीगंज विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कक्षाओं का भ्रमण कर बच्चों से बातचीत की और शिक्षकों से शिक्षा की गुणवत्ता व सुविधाओं पर चर्चा की। सांसद ने निर्देश दिए कि बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिलना चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ग्राम सभाओं में समस्याओं का अंबार, मिला समाधान का आश्वासन
सांसद का काफिला रानीपट्टी, सेलहुपार और मलिकानपुर (पाल बस्ती) जैसी कई ग्राम सभाओं में पहुँचा। यहाँ आयोजित बैठकों में ग्रामीणों ने अपनी मूलभूत समस्याओं जैसे सड़क, बिजली और जल निकासी के मुद्दों को प्रमुखता से रखा।
जनता की बात: ग्रामीणों ने सांसद को अपने बीच पाकर खुलकर अपनी बात रखी।
सांसद का संकल्प: उन्होंने आश्वासन दिया कि जनता की हर वाजिब मांग को संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाकर उनका त्वरित समाधान कराया जाएगा।
जनचौपालों के जरिए जन-संवाद
दिन के अंतिम चरणों में जमालपुर, मीठेपर और गनापुर बाजार सहित विभिन्न स्थानों पर भव्य 'जनचौपाल' का आयोजन किया गया। इन चौपालों में सांसद प्रिया सरोज ने जनता से सीधा संवाद किया और सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "मेरा उद्देश्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि मड़ियाहूं की जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।"
मुख्य आकर्षण:
शिक्षा व्यवस्था को लेकर सांसद की संवेदनशीलता।
ग्रामीण अंचलों में जनता के बीच पहुँचकर उनकी बात सुनना।
शोक संतप्त परिवारों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण।