चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां मुखनिर्मालिका गौरी के दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़, विशेष फलदायी मानी जाती है गौरी के इस स्वरूप की आराधना
वाराणसी। चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही काशी में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के पहले दिन परंपरा के अनुसार गायघाट स्थित मां मुखनिर्मालिका गौरी मंदिर में विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया। प्रातःकाल मंदिर में विधि-विधान से पंचामृत स्नान, वैदिक मंत्रोच्चार और भव्य श्रृंगार के साथ मां का अभिषेक किया गया, जिसके बाद मंगला आरती संपन्न हुई।
श्रृंगार और आरती के उपरांत जैसे ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, वैसे ही दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार लग गई। सुबह से ही श्रद्धालु बड़ी संख्या में गंगा तट स्थित गायघाट पहुंचने लगे। परंपरा के अनुसार कई भक्त पहले गंगा स्नान कर स्वयं को पवित्र कर मां के दरबार में उपस्थित हुए और फल, फूल, नारियल, चुनरी व सिंदूर अर्पित कर पूजा-अर्चना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन मां मुखनिर्मालिका गौरी के दर्शन अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ऐसा विश्वास है कि उनके दर्शन से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और पापों का नाश होता है। इसी दिन श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना कर नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र व्रत का संकल्प भी लेते हैं।
काशी में नवरात्रि के दौरान नवगौरी यात्रा का विशेष महत्व है। इस परंपरा के तहत भक्त नौ दिनों तक मां के नौ विभिन्न स्वरूपों के दर्शन करते हैं। इस यात्रा की शुरुआत पहले दिन मां मुखनिर्मालिका गौरी के दर्शन से होती है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में दर्शन-पूजन की प्रक्रिया सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है। दिनभर मंदिर परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा और देर रात तक दर्शन का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पूरे क्षेत्र में उत्साह, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण महसूस किया जा रहा है।