logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

"कोटि सूर्योपासना" कार्यक्रम

‘‘कोटि सूर्याेपासना’’ कार्यक्रम- सम्राट विक्रमादित्य नाट्य का मंचन
कलाकारों ने शानदार नाट्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों को किया आकर्षित


रिपोर्टर -
भगवानदास शाह
जिला बुरहानपुर



बुरहानपुर/19 मार्च, 2026/- ‘‘विक्रमोत्सव-2026’’ सृष्टि आरंभ दिवस, वर्ष प्रतिपदा विक्रम संवत् 2083 के अवसर पर जिला स्तरीय ‘‘कोटि सूर्याेपासना’’ कार्यक्रम परमानंदजी गोविंदजीवाला ऑडिटोरियम में आयोजित रहा। इस अवसर पर कलेक्टर श्री हर्ष सिंह, एसपी श्री देवेन्द्र पाटीदार, सीईओ जिला पंचायत एवं अपर कलेक्टर श्री सृजन वर्मा सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिकगण मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप-प्रज्जवलन कर किया गया।
चैत्र नवरात्रि एवं हिन्दू नववर्ष के शुभ दिन पर आयोजित कार्यक्रम में अविराम जनकल्याण संस्था भोपाल से आए कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य केन्द्रित जीवंत नाट्य का मंचन किया। नाट्य मंचन के माध्यम से कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य जी के जीवन चित्रण की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। श्री सुनील राज के निर्देशन में सुश्री आरती विश्वकर्मा, श्री रोहित पटेल, श्री पीयूष सैनी, श्री लक्ष्य श्रवण, सुश्री श्रीवास्तव, श्री हिमांशु प्रजापति, श्री विशाल बकोरिया, श्री श्रेयस सेन, सुश्री प्रीति आशा, सुश्री दीपा चौहान, श्री कृष्णा राठौर, श्री अश्विनी कुमार, श्री आधार नामदेव, समन्वयक श्री ऋषि एवं टीम ने कार्यक्रम में समा बांधा।
विदित है कि सम्राट विक्रमादित्य एक पराक्रमी, न्यायप्रिय और विद्यवान शासक थे, जिन्होंने अपने शासनकाल में न केवल भारत बल्कि पड़ोसी देशों तक अपनी प्रतिष्ठा स्थापित की। विक्रमादित्यजी की छवि एक सार्वभौमिक सम्राट की थी, जो केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, साहित्यिक और न्यायिक रूप से भी अद्वितीय थे। विक्रमादित्य के संबंध में कई कथाएँ और लोकगाथाएँ प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक रूप से सम्राट विक्रमादित्य को 57 ईसा पूर्व में शासन करने वाला माना जाता है। उनके नाम पर ही विक्रम संवत् का प्रचलन हुआ, जो आज भी भारतीय पंचांग का एक प्रमुख संवत् है। विक्रमादित्य की सार्वभौम छवि और उनकी व्यापक सत्ता के प्रमाण विभिन्न ऐतिहासिक ग्रंथों, लोककथाओं और पुरातात्विक अवशेषों में मिलते है। विक्रमादित्य ने शक आक्रांताओं को पराजित कर विक्रम संवत् का प्रारंभ किया।
हिन्दू नववर्ष का सांस्कृतिक महत्व
हिन्दू नववर्ष का सांस्कृतिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि यह एक अवसर होता है, जब हम अपने पुराने वर्षाे की कठिनाईयों, संघर्षों और समस्याओं को पीछे छोड़कर, एक नई शुरूआत करते है। यह एक पुनः निर्माण का समय है, जब हम अपने जीवन में सुधार और परिवर्तन लाने का संकल्प करते है।

11
729 views

Comment