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खोई चहचहाहट का 'मसीहा': कबाड़ में जान फूंककर आकाश ने फिर बसाया गौरैया का संसार

​(विशेष रिपोर्ट: इंद्रपाल सिंह)
​विकासनगर (देहरादून): कहते हैं कि "इंसान अगर ठान ले तो उजड़े हुए चमन भी फिर से महक उठते हैं।" इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है विकासनगर के ग्राम एटनबाग निवासी एक युवा पर्यावरण प्रेमी आकाश मुल्तानी ने।

जहाँ आधुनिकता की अंधी दौड़ और कंक्रीट के बेजान जंगलों ने हमारे आंगन की नन्हीं गौरैया को हमसे छीन लिया, वहीं आकाश पिछले 4 वर्षों से उसी खोई हुई चहचहाहट को वापस लाने की अनूठी 'तपस्या' में लीन हैं।

​आकाश का यह मिशन किसी सरकारी बजट या बड़े तामझाम का मोहताज नहीं है, बल्कि यह उनकी संवेदनशीलता और अटूट इच्छाशक्ति की उपज है। उन्होंने समाज द्वारा फेंके गए 'कबाड़'—जैसे इंजन के पुराने एयर फिल्टर, पीवीसी पाइप और लकड़ी के टुकड़ों—को ही गौरैया का 'सुरक्षा कवच' बना दिया है। उनके द्वारा निर्मित ये कृत्रिम घोंसले उन परिंदों के लिए सबसे सुरक्षित आशियाना बन चुके हैं, जिन्हें कंक्रीट की दीवारों में कहीं जगह नहीं मिल रही थी।

आकाश मुल्तानी के इस अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि उन्होंने 'वेस्ट' को 'बेस्ट' में बदल दिया है। लकड़ी के पुराने टुकड़ों और बेकार पड़े एयर फिल्टरों से तैयार ये घोंसले न केवल किफायती हैं, बल्कि गौरैया को वही प्राकृतिक अहसास देते हैं जो कभी उन्हें पेड़ों की कोटरों में मिलता था। आज आकाश के इन प्रयासों का ही नतीजा है कि क्षेत्र के कई घरों की बालकनियों में टंगे इन घोंसलों में गौरैया के नए चूजों का जन्म हो रहा है, जो जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी जीत है।

आकाश का जुनून सिर्फ घोंसले बनाने तक सीमित नहीं है। उन्होंने बेजुबान पक्षियों के दाने-पानी के लिए पुराने टीन के कनस्तरों और मिट्टी के पात्रों से विशेष बर्तन तैयार किए हैं। सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि आकाश इन घोंसलों और दाना-पानी के बर्तनों को स्थानीय लोगों को निशुल्क वितरित करते हैं, ताकि हर घर में फिर से गौरैया चहक सके।

​20 मार्च (विश्व गौरैया दिवस) के अवसर पर आकाश मुल्तानी का यह संघर्ष उन लोगों के लिए एक करारा जवाब और बड़ी प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी का बहाना बनाते हैं। आकाश ने साबित कर दिया है कि अगर दिल में परिंदों के लिए दर्द और प्रकृति के लिए प्रेम हो, तो कबाड़ से भी खुशियों का संसार बसाया जा सकता है। आज पूरा विकासनगर इस 'गौरैया के रक्षक' के जज्बे को सलाम कर रहा है।

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