भाजपा ने असम में लिए बड़े और साहसिक फैसले, कई पुराने चेहरे बाहर, कई नई नियुक्तियां :-
असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भाजपा की पहली सूची ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। पार्टी ने एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा को उनके पारंपरिक गढ़ जालुकबाड़ी से फिर मैदान में उतारा है, वहीं दूसरी तरफ कई स्थापित नेताओं के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका दिया है। भाजपा की पहली सूची में 88 उम्मीदवारों की घोषणा की गई, जिसे राजनीतिक हलकों में संगठनात्मक पुनर्संतुलन, जीत की संभावना और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया बड़ा निर्णय माना जा रहा है। इस सूची का सबसे चर्चित फैसला दिसपुर सीट को लेकर सामने आया है। पुराने भाजपा नेता अतुल बोरा को हटाकर हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए प्रद्युत बोरदोलोई को वहां सेउम्मीदवार बनाया गया है। इसी तरह न्यू गुवाहाटी में पूर्व भाजपा अध्यक्ष सिद्धार्थ भट्टाचार्य को हटाकर दिप्लु रंजन सरमाह को टिकट दिया गया है। पलासबाड़ी में हेमंगा ठाकुरिया की जगह हिमांशु शेखर बैश्य को उतारा गया है, जबकि बिहपुरिया में भूपेन बोरा को आगे कर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी अब नए समीकरणों को आक्रामक रूप से साधना चाहती है। प्रद्युत बोरदोलोई का भाजपा में हालिया प्रवेश और उसके तुरंत बाद उनकी उम्मीदवारी इस रणनीति को और स्पष्ट करता है। ऊपरी असम की कई सीटों पर भी भाजपा ने महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं। तिनसुकिया में पुलक गोहाईं को आगे बढ़ाया गया है, जबकि मकुम में संजय किशन को नई सीट से उतारने का फैसला पार्टी की अंदरूनी रणनीतिक पुनर्संरचना की ओर इशारा करता है। बिश्वनाथ में पुराने भाजपा नेता प्रमोद बोरठाकुर की जगह पल्लब लोचन दास को मैदान में उतारा गया है। बोकाजन में डिप्टी स्पीकर डॉ. नुमल मोमिन को हटाकर सूरज्या रोंगफार को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं सिलचर में पूर्व सांसद राजदीप राय को मौका दिया गया है। इन फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि भाजपा ने केवल परंपरागत निष्ठा के आधार पर टिकट नहीं बांटे, बल्कि स्थानीय प्रभाव, नए सामाजिक समीकरण और चुनावी उपयोगिता को प्राथमिकता दी है। हालांकि पार्टी ने बड़े बदलावों के साथ निरंतरता भी बनाए रखी है। डिगबोई से सुरेन फुकन को बरकरार रखा गया है, दिब्रूगढ़ से प्रसांत फुकन को फिर टिकट दिया गया है, और जोरहाट से हितेंद्र नाथ गोस्वामी पर भरोसा दोहराया गया है। सबसे महत्वपूर्ण यह कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर जालुकबाड़ी से चुनाव लड़ेंगे, जो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में स्थिरता का संकेत है। कुल मिलाकर यह सूची बताती है कि भाजपा ने असम में चुनाव 2026 को केवल नियमित चुनाव नहीं, बल्कि एक आक्रामक राजनीतिक पुनर्संयोजन के रूप में लिया है जहां कुछ दिग्गजों को किनारे कर, कुछ नए आयातित चेहरों को आगे कर, और कुछ भरोसेमंद नेताओं को बनाए रखकर पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका लक्ष्य सिर्फ सत्ता बचाना नहीं, बल्कि राजनीतिक बढ़त को और मजबूत करना है।