logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

ताज़ा न्यूज़ रिपोर्ट स्ट्रेट ऑफ़ Strait of Hormuz क्षेत्र में विस्फोट के बाद वैश्विक तनाव बढ़ा, भारत की भूमिका पर सवाल

मध्य पूर्व से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कुछ ही घंटे पहले रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) क्षेत्र के आसपास बम विस्फोट की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। यह वही इलाका है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल समुद्री मार्ग से गुजरता है।
सूत्रों के अनुसार, United States की सेना ने Iran के तटवर्ती क्षेत्रों में स्थित कई मजबूत सैन्य ठिकानों पर 5000 पाउंड के गहरे भेदक बमों का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि ये ठिकाने ईरान की क्रूज मिसाइल प्रणाली से लैस थे, जो अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों के लिए संभावित खतरा बन सकते थे।
तेल आपूर्ति पर असर, भारत पहुंचे दो जहाज़
इस हमले के बीच बड़ी राहत की खबर यह है कि कच्चे तेल से भरे दो जहाज़ किसी तरह सुरक्षित रूप से भारत पहुंचने में सफल रहे। हालांकि, इस पर भारत सरकार द्वारा श्रेय लेने की कोशिश को कई विश्लेषक “बेबुनियाद” बता रहे हैं।
कूटनीतिक घटनाक्रम पर उठे सवाल
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हमले से कुछ समय पहले भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की मुलाकात Benjamin Netanyahu से हुई थी। इसके तुरंत बाद Israel और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमला किए जाने से कुछ हलकों में भारत की भूमिका को लेकर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वैश्विक प्रतिक्रिया और भारत का रुख
जहां दुनिया के कई देशों ने इस हमले की निंदा की, वहीं भारत ने पश्चिमी देशों के साथ खड़े होकर ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों की आलोचना की। इस रुख ने देश के भीतर भी बहस छेड़ दी है।
सामाजिक संगठनों का विरोध
देश के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस घटनाक्रम का विरोध किया है। Jharkhand Janadhikar Mahasabha और True Gandhian Group जैसे समूहों ने अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई की आलोचना करते हुए ईरान के समर्थन में बयान जारी किए।इसके अलावा कई मुस्लिम संगठनों ने भी विरोध दर्ज कराते हुए ईरान से भारत को तेल आपूर्ति जारी रखने की अपील की।
ऊर्जा संकट और सामाजिक संदर्भ
विशेषज्ञों का मानना है कि इन अपीलों और दबावों का असर ही रहा कि दो तेल टैंकर भारत पहुंच सके, जिससे फिलहाल संभावित ऊर्जा संकट को कुछ समय के लिए टाला जा सका है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच देश के सामाजिक ताने-बाने पर भी सवाल उठ रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब देश में रमजान का महीना चल रहा है और साम्प्रदायिक तनाव के मुद्दे चर्चा में हैं।
गांधीवादी विचारधारा पर बहस
यह घटनाक्रम एक बार फिर भारत की वैश्विक छवि और उसकी पारंपरिक Gandhian philosophy पर आधारित अहिंसा की नीति पर सवाल खड़े करता है।विश्लेषकों का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति और आंतरिक सामाजिक संतुलन दोनों पर गंभीर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट:
नरेंद्र वर्मा,
सीनियर जर्नलिस्ट

7
1701 views

Comment