सालगांवा कला में मनरेगा कार्यों में बड़ा घोटाला! डबरी निर्माण , में फर्जी हाजिरी और बिना नोटिस बोर्ड के काम पूरा
सालगांवा कला में मनरेगा कार्यों में बड़ा घोटाला! डबरी निर्माण , में फर्जी हाजिरी और बिना नोटिस बोर्ड के काम पूरा
सोनहत/कोरिया:
ग्राम पंचायत सालगांवकला में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे डबरी निर्माण कार्य में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
ग्रामीणों, वार्ड पंच एवं जनप्रतिनिधियों ने रोजगार सहायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार डबरी निर्माण का कार्य आधा-अधूरा ही छोड़ दिया गया, लेकिन कागजों में इसे पूर्ण दर्शाया जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि कार्य स्थल पर अनिवार्य नोटिस बोर्ड तक नहीं लगाया गया, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि बिना किसी सूचना के कार्य शुरू किया गया और समाप्त भी कर दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार कार्य प्रारंभ होने से पहले सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है।
मौके पर सूचना पटल का बोर्ड रखा होना भी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है।
यदि ग्राही राजेश राजवाड़े ने और/ग्रामीणों ने रोजगार सहायक पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कार्यों में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
वार्ड पंच ने भी आरोप लगाया कि रोजगार सहायक द्वारा किसी भी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जाता और न ही ग्रामीणों को उचित जानकारी दी जाती है।
मामले को और गंभीर बनाते हुए हितग्राही राजेश कुमार राजवाड़े ने आरोप लगाया कि मनरेगा में फर्जी हाजिरी भरने का खेल चल रहा है। यहां तक कि सरपंच की पत्नी के नाम पर भी हाजिरी दर्ज की गई है,
जबकि वह कार्य स्थल पर उपस्थित नहीं थीं। वहीं उप सरपंच पर भी हाजिरी लेने का और अपने भाई के नाम पर हाजिरी भरवाने का आरोप लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूरे कार्य में “बंदरबांट” की स्थिति बनी हुई है, जहां सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
इस प्रकार की अनियमितता से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों की मांग:
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए, साथ ही फर्जी हाजिरी और अधूरे कार्यों की जांच कर सरकारी राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन से अपेक्षा:
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेकर क्या कार्रवाई करता है, और क्या दोषियों पर कार्यवाही कर मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण योजना की पारदर्शिता बहाल की जाती है या नहीं।
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