असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी के भीतर चल रहे विवादों को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी :
असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी के भीतर चल रहे विवादों को लेकर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस हाईकमान को पत्र भेजने के बाद उन्होंने कहा कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों ने उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है, जिसके कारण उन्हें अपनी बात खुलकर सामने रखने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रद्युत बोरदोलोई ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय से उनके खिलाफ संगठित और योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह सब असम कांग्रेस की आंतरिक राजनीति से जुड़ा हुआ है, खासकर उन घटनाओं से जिनका संबंध कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के समर्थन में चल रही गतिविधियों से बताया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कुछ नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां ऐसी रही हैं, जिनसे यह प्रतीत होता है कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित हमला किया जा रहा है। बोरदोलोई ने कहा कि यह स्थिति उनके लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अत्यंत पीड़ादायक रही है। अपने वक्तव्य में बोरदोलोई ने कहा, “गौरव गोगोई ने मेरे खिलाफ बयान दिया, और इसी कारण मुझे कांग्रेस हाईकमान को यह पत्र लिखना पड़ा। एक ऐसा व्यक्ति जो आत्मसम्मान के साथ जीवन जीता है, उसके लिए ऐसी परिस्थितियों में चुप रहना संभव नहीं होता।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर कुछ घटनाएं और बयान ऐसे हुए हैं जिन्होंने उनके सम्मान और राजनीतिक गरिमा को प्रभावित किया है। इसी वजह से उन्होंने इस मामले को पार्टी नेतृत्व के सामने औपचारिक रूप से उठाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बोरदोलोई का यह सार्वजनिक बयान असम कांग्रेस के भीतर पहले से चल रहे आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व संघर्ष को और अधिक तेज कर सकता है। आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए पार्टी के भीतर बढ़ती इस खींचतान का असर संगठनात्मक एकजुटता पर भी पड़ सकता है। असम की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस फिलहाल राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेताओं के बीच उभरते मतभेद पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकते हैं। अब सबकी नजर कांग्रेस हाईकमान की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाने का प्रयास करता है और क्या पार्टी के भीतर बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।